पटना: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफे को लेकर रविवार को बिहार की राजनीति में दिनभर गहमागहमी बनी रही। इस्तीफे की तमाम औपचारिकताओं और विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी के बावजूद, नितिन नवीन अपना त्यागपत्र सौंपने विधानसभा नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार, अचानक आए एक महत्वपूर्ण सांगठनिक कार्यक्रम के कारण उन्हें असम रवाना होना पड़ा, जिससे इस्तीफे की प्रक्रिया टल गई।
विधानसभा में रविवार को भी रही हलचल
आम तौर पर रविवार को बिहार विधानसभा बंद रहती है, लेकिन नितिन नवीन के इस्तीफे की गंभीरता को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए थे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, जो दिल्ली के दौरे पर थे, शनिवार देर रात ही विशेष रूप से पटना लौट आए थे। रविवार सुबह वह स्वयं विधानसभा कार्यालय पहुंचे और सचिवालय के अधिकारियों को भी प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार रखा गया था। हालांकि, लंबे इंतजार के बाद भी नितिन नवीन वहां नहीं पहुंचे।
असम दौरे ने बिगाड़ा समीकरण
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि नितिन नवीन का इस्तीफा आज ही होना तय था। उन्होंने कहा, “पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उन्हें अचानक किसी आपातकालीन सांगठनिक कार्य से असम जाना पड़ा। इसी वजह से वह आज इस्तीफा देने नहीं आ सके। अब वह जल्द ही किसी अन्य तिथि पर इस्तीफा सौंपेंगे।”
30 मार्च की डेडलाइन का दबाव
नितिन नवीन के पास विधायक पद छोड़ने के लिए अब समय बहुत कम बचा है। ‘बिहार विधानसभा कार्य संचालन नियमावली’ और ‘Prohibition of Simultaneous Membership Rules, 1950’ के अनुसार:
यदि कोई विधायक या विधान परिषद सदस्य संसद के किसी सदन (राज्यसभा या लोकसभा) के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी राज्य विधायिका की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
नितिन नवीन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शिवेश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर 16 मार्च, 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए थे।
इस नियम के तहत, 30 मार्च को 14 दिनों की यह कानूनी समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त हो रही है। यदि इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया जाता, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर संकट आ सकता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दे सकते हैं इस्तीफा
नितिन नवीन के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर भी अटकलें तेज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश कुमार भी कल यानी 30 मार्च (सोमवार) को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। हालांकि, संवैधानिक जानकारों का कहना है कि विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं, क्योंकि नियम के मुताबिक कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य रहे 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद संभाल सकता है।