पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची पर भूचाल आ गया। चुनाव आयोग ने 23 मार्च की आधी रात पहली SIR सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की, लेकिन कुल नाम जुड़ने-हटने के आंकड़े अब तक गुप्त हैं। इससे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया। 23-29 अप्रैल को 294 सीटों पर वोटिंग और 4 मई को गिनती होगी।
60 लाख नामों पर लटकी तलवार
28 फरवरी की अंतिम सूची में 60 लाख नाम “अंडर एडजुडिकेशन” चिह्नित थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 705 न्यायिक अधिकारियों ने जांच शुरू की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के अनुसार 29 लाख नामों का फैसला हो चुका, बाकी प्रक्रिया जारी है। बूथ स्तर पर लिस्ट चेक करने में तकनीकी खराबी की शिकायतें आईं।
TMC का हाईकोर्ट जाने का ऐलान
तृणमूल कांग्रेस ने प्रक्रिया पर सवाल ठोक दिया। कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने भवानीपुर में 40% नाम हटने का दावा किया। “संविधान वोट का अधिकार देता है। चुनाव आयोग अगर भारत विरोधी है तो हाईकोर्ट में उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।” TMC इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रही है। फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए आयोग हटाने की मांग की।
BJP ने ठहराया सुप्रीम कोर्ट का फैसला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इसे न्यायिक प्रक्रिया बताया। “सुप्रीम कोर्ट और कोलकाता हाईकोर्ट की निगरानी में तैयार सूची। फर्जी वोटर साफ हो रहे हैं।” उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल बोलीं, “आधी रात नाम नहीं बदलते। अवैध मतदाताओं को हटाया गया। लोकतंत्र में केवल वैध वोटर ही वोट देंगे।”
विवाद के केंद्र में SIR प्रक्रिया
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 6.2 मिलियन नाम पहले ही हट चुके। बाकी 60 लाख पर ट्रिब्यूनल फैसला ले रहे। नाम हटे मतदाता 15 दिनों में अपील कर सकते हैं। 19 अपील ट्रिब्यूनल 23 जिलों में तैनात हैं। तकनीकी दिक्कतों से लाखों मतदाता परेशान।
चुनावी रणनीति में बदलाव
- TMC: वोटर सूची पर कोर्ट जाएगी, कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर अलर्ट
- BJP: नितिन नवीन के साथ सीट-वार रणनीति, फर्जीवाड़ा उजागर अभियान
सुरक्षा: राज्य भर में पुलिस अलर्ट, संवेदनशील बूथों पर फोकस
2026 चुनावी कैलेंडर
- पहली वोटिंग: 23 अप्रैल
- दूसरी वोटिंग: 29 अप्रैल
- मतगणना: 4 मई
- कुल सीटें: 294
राजनीतिक प्रभाव
वोटर लिस्ट विवाद ने चुनावी माहौल गरमा दिया। TMC इसे साजिश बता रही, BJP सफाई का दावा कर रही। अंतिम आंकड़े जारी होने और अपील प्रक्रिया के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। यह विवाद 2026 बंगाल चुनाव का टर्निंग पॉइंट बन सकता है।