मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच भारतीय रुपया भारी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन रुपया 41 पैसे टूटकर 93.94 प्रति डॉलर पर आ गया, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में चिंता बढ़ गई है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.84 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान और गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया पहली बार 93 के पार गया था और 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
वैश्विक कारणों से बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी मुद्रा की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी और घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट ने स्थिति को और कमजोर किया है।
छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स बढ़कर 99.66 पर पहुंच गया, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की मजबूत स्थिति को दिखाता है।
शेयर बाजार में भी भारी गिरावट
कमजोर रुपये के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,306.27 अंक यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 73,226.69 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 418.25 अंक यानी 1.81 प्रतिशत टूटकर 22,696.25 पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मानक Brent Crude का भाव लगभग 112.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
विशेषज्ञों की चिंता
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के अनुसार, पहले कुछ समय के लिए बैंकिंग कदमों और केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से रुपये में स्थिरता आई थी, लेकिन लगातार गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक नहीं चाहता कि रुपया और अधिक कमजोर होकर नए निचले स्तरों पर पहुंच जाए।