पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह संघर्ष सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि जिन देशों को दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में गिना जाता था, वहां भी अचानक मिसाइल या ड्रोन हमले का खतरा मंडराने लगा है।
हाल ही में ईरान ने एक बार फिर United Arab Emirates को निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुबई एयरपोर्ट के आसपास ड्रोन हमले के बाद अब अबू धाबी के अल बह्याह इलाके में एक नागरिक वाहन पर मिसाइल गिरने की घटना सामने आई है। इस हमले में एक फलस्तीनी नागरिक की मौत की खबर है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें और अफवाहों से बचें।
तनाव का असर Saudi Arabia में भी देखने को मिला। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। ये ड्रोन राजधानी रियाद और पूर्वी क्षेत्र के ऊपर देखे गए थे। एयर डिफेंस सिस्टम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया, जिससे किसी प्रकार का नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं है। क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक ईरान की ओर से यूएई की तरफ 165 बैलिस्टिक मिसाइल, 2 क्रूज मिसाइल और 500 से अधिक ड्रोन दागे जा चुके हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश को यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही मार गिराया। इसके बावजूद कुछ ड्रोन और मलबा गिरने से कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत भी हुई है। यूएई के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है और मिसाइल तथा ड्रोन खतरों का सामना कर रही है। मंत्रालय के अनुसार हाल के दिनों में जो तेज धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दीं, वे दरअसल एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की कार्रवाई का परिणाम थीं।
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे इन हमलों ने क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।