देश की राजधानी नई दिल्ली में सोमवार को विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने एक बड़े प्रदर्शन का आयोजन किया। ‘विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र की हत्या है’ के नारे के साथ हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर लगातार हमला हो रहा है और विपक्ष की आवाज को व्यवस्थित तरीके से दबाया जा रहा है।
संसद से सड़क तक उठी आवाज
यह प्रदर्शन ऐसे वक्त में हुआ जब संसद के बजट सत्र में विपक्ष पहले से ही सरकार के रवैये से नाराज है। पश्चिम एशिया संकट पर तत्काल चर्चा की मांग ठुकराए जाने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट से शुरू हुआ यह आक्रोश अब सड़कों पर भी उतर आया है। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां थामकर नारे लगाए और सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज देश में स्थिति यह है कि जो भी सरकार से सवाल पूछे उसे चुप करा दिया जाता है। संसद में विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जाता, मीडिया पर दबाव बनाया जाता है और नागरिक समाज की आवाज को भी दबाने की कोशिश होती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि संसद में विपक्ष को पर्याप्त समय और अवसर दिया जाए, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर खुली और निष्पक्ष बहस हो तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखी जाए।
लोकतंत्र बचाने की अपील
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से नहीं बनता। लोकतंत्र तब जीवित रहता है जब विपक्ष को बोलने का अधिकार हो, मीडिया स्वतंत्र हो और न्यायपालिका निर्भीक हो। उन्होंने देश के नागरिकों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आएं और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। प्रदर्शनकारियों का संदेश साफ था जब तक सांस है, लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे।