अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले जारी हैं और इस बीच एक नया राजनीतिक विवाद सामने आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर जमकर निशाना साधा। ट्रंप ने साफ शब्दों में कह दिया कि अमेरिका को अब ब्रिटेन की जरूरत नहीं है। यह बयान तब आया जब खबरें आईं कि ब्रिटेन अब पश्चिम एशिया में अपने विमानवाहक पोत भेजने पर विचार कर रहा है, जबकि जब असली जरूरत थी तब वह पीछे हट गया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ब्रिटेन और प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि यूनाइटेड किंगडम जो कभी अमेरिका का सबसे महान सहयोगी हुआ करता था, वह अब मिडिल ईस्ट में दो विमानवाहक पोत भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।ट्रंप ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ठीक है प्रधानमंत्री स्टार्मर, लेकिन अब हमें उनकी जरूरत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि हम यह जरूर याद रखेंगे। ट्रंप का सबसे तीखा बयान यह था कि अमेरिका को ऐसे लोगों की कोई जरूरत नहीं है जो युद्ध जीत जाने के बाद उसमें शामिल होने आते हैं। यह बयान साफ तौर पर ब्रिटेन की उस नीति पर चोट था जिसमें उसने ईरान पर सीधे हमले में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।ट्रंप ने पहले भी की थी आलोचनाशनिवार की पोस्ट से पहले भी मंगलवार को ट्रंप ने ईरान मामले में ब्रिटेन के रवैये को बेहद असहयोगी बताया था।
उन्होंने कीर स्टार्मर की जमकर आलोचना करते हुए कहा था कि वे दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि स्टार्मर विंस्टन चर्चिल नहीं हैं, जो कि ब्रिटेन के सबसे महान और साहसी नेताओं में गिने जाते हैं। यह टिप्पणी स्टार्मर के लिए एक बड़ा राजनीतिक अपमान माना जा रहा है।स्टार्मर ने अपने फैसले को सही ठहरायादूसरी तरफ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा।
बुधवार को ब्रिटिश संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी विमान ब्रिटिश ठिकानों से उड़ान भर रहे हैं और यही दोनों देशों के बीच स्पेशल रिलेशनशिप की असली पहचान है।स्टार्मर ने आगे कहा कि ब्रिटिश जेट विमान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए ड्रोन और मिसाइलों को मार गिरा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश प्रतिदिन एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं ताकि अपने-अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके। स्टार्मर के मुताबिक यही असली स्पेशल रिलेशनशिप है।ईरान पर सीधे हमले में शामिल न होने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए स्टार्मर ने कहा कि उन्हें इस कार्रवाई का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं दिखा और उनका रुख अभी भी वही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना कानूनी जमीन के किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होना संभव नहीं है।ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने 7 मार्च के ऑपरेशन अपडेट में बताया कि अमेरिका ने रक्षात्मक अभियानों के लिए ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग शुरू कर दिया है।
इन अभियानों का मकसद ईरान को क्षेत्र में मिसाइलें दागने से रोकना है क्योंकि इससे ब्रिटिश नागरिकों की जान को सीधा खतरा था।दोनों देशों के रिश्तों पर असरइस पूरे विवाद ने अमेरिका और ब्रिटेन के ऐतिहासिक संबंधों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। दोनों देश लंबे समय से एक-दूसरे के करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन ईरान मामले में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अब देखना यह होगा कि यह कूटनीतिक तनाव आगे किस दिशा में जाता है।