नीतीश कुमार का बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। मार्च 2026 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से यह फैसला लिया और राज्यसभा सदस्य बनने का रास्ता चुना।
राजनीतिक यात्रा
नीतीश कुमार बिहार के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में से एक हैं। 1951 में ब生的 हुए नीतीश ने 1970 के दशक से राजनीति में कदम रखा। वे जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) के संस्थापक नेता हैं और बिहार को लूटपाट से मुक्त करने के लिए जाने जाते हैं। 2005 में पहली बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई, जिसने बिहार को पटरी पर लाने का काम किया। उसके बाद 2015, 2022 और 2025 तक कई बार सत्ता में आए। 2025 विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद नवंबर में उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनका करियर गठबंधन राजनीति का प्रतीक रहा—NDA के साथ तो रहे, तो विपक्षी महागठबंधन में भी।
इस्तीफे के पीछे कारण
इस इस्तीफे की मुख्य वजह उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति रही। 75 वर्षीय नीतीश कुमार लंबे समय से शारीरिक रूप से कमजोर दिख रहे थे। हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों और वीडियो में उनकी थकान, बोलने में कठिनाई साफ नजर आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार तनावपूर्ण राजनीति ने उनकी सेहत बिगाड़ दी। 4 मार्च 2026 को उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया, जो इस्तीफे का संकेत था। कुछ रिपोर्ट्स में प्राशांत किशोर जैसे नेताओं ने भी उनकी फिटनेस पर सवाल उठाए थे। यह फैसला अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि बिहार की राजनीति में उनके उत्तराधिकार की चर्चा लंबे समय से चल रही थी।
बिहार पर प्रभाव
नीतीश के जाने से बिहार NDA सरकार के नेतृत्व में बदलाव देखेगा। संभावना है कि BJP अपना मुख्यमंत्री चुनेगी, क्योंकि वह गठबंधन में सबसे बड़ी ताकत है। JD(U) में उनके बेटे निशांत कुमार सिंह को डिप्टी सीएम या महत्वपूर्ण पद मिल सकता है, जो पार्टी को नई पीढ़ी सौंपने की रणनीति है। विपक्षी दल जैसे RJD इसे NDA में दरार का मौका मान रहे हैं। विकास के मोर्चे पर नीतीश युग ने सड़कें, बिजली और कानून-व्यवस्था सुधारी, लेकिन पलटियां उनकी छवि को प्रभावित करती रहीं। अब नया नेतृत्व चुनौतियों जैसे बेरोजगारी, प्रवासन और आगामी लोकसभा चुनावों का सामना करेगा।
नीतीश कुमार का इस्तीफा उनके लंबे शासन का अंत है, लेकिन बिहार राजनीति पर उनका प्रभाव बरकरार रहेगा। स्वास्थ्य प्राथमिकता बन गया, जो उम्रदराज नेताओं के लिए सबक है। यह बदलाव NDA की मजबूती और JD(U) के भविष्य को परिभाषित करेगा