ईरान ने अब ड्रोन और छोटे मिसाइल हमलों से जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है, जो मिडिल ईस्ट के कई शहरों को निशाना बना रही है। इससे क्षेत्रीय अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है। इसी बीच, इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने रविवार को सदस्यों को सलाह दी कि वे ईरान और खाड़ी देशों के साथ नए ‘कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्रेट’ (CIF) कॉन्ट्रैक्ट्स न करें। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव से शिपमेंट्स बाधित हो सकते हैं और फ्रेट व इंश्योरेंस खर्च आसमान छू सकते हैं। CIF डील में विक्रेता को सामान खरीदार के पोर्ट तक ट्रांसपोर्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट का बोझ उठाना पड़ता है।
यह सलाह 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर बड़े हमले के बाद आई है। इससे व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ गई है, खासकर पर्सियन गल्फ के रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग प्रतिबंधों की। एक्सपोर्टर्स डर रहे हैं कि लंबे संघर्ष से समुद्री मार्ग बंद हो जाएंगे और भारी वित्तीय नुकसान होगा।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है, जो वैश्विक सप्लाई का 70% से ज्यादा पैदा करता है। हर साल करीब 60 लाख टन बासमती का निर्यात होता है, जिसकी वैल्यू लगभग 50,000 करोड़ रुपये है। पंजाब और हरियाणा मिलकर भारत के प्रीमियम सुगंधित बासमती निर्यात का 75% हिस्सा देते हैं हरियाणा का योगदान 35% और पंजाब का 40%। इन राज्यों के किसान और व्यापारी अब चिंतित हैं, क्योंकि खाड़ी बाजार उनका प्रमुख गंतव्य हैं।
IREF के मुताबिक, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ तो न सिर्फ बासमती, बल्कि अन्य कमोडिटीज का व्यापार भी ठप हो सकता है। फ्रेट रेट्स पहले ही दोगुने हो चुके हैं और इंश्योरेंस प्रीमियम स्काईरॉकेट कर रहा है। छोटे एक्सपोर्टर्स तो पहले ही परेशान हैं, बड़े प्लेयर्स भी वैकल्पिक रूट्स तलाश रहे हैं।
सरकार ने भी हरकत में आते हुए एक्सपोर्टर्स से स्टॉक पाइलअप करने और डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करने को कहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और यूरोप जैसे नए बाजारों पर जोर देना होगा। लेकिन तत्काल संकट से बचाव मुश्किल है अगर युद्ध लंबा चला तो लाखों किसानों की कमाई पर असर पड़ेगा।
50,000 करोड़ का बासमती बिजनेस खतरे में है। एक्सपोर्टर्स को सतर्क रहना होगा और सरकार से तुरंत राहत पैकेज की उम्मीद है।