अमेरिका में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए कुछ ग्लोबल टैरिफ रद्द कर दिए। अदालत ने कहा कि इन्हें सही कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू किया गया था। इस फैसले ने एक बार फिर अमेरिकी लोकतंत्र और संविधान के खास सिद्धांतों को सामने लाया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी कोर्ट किसी राष्ट्रपति को, चाहे वह वर्तमान में हो या पूर्व, सजा सुना सकती है।
क्या राष्ट्रपति कानून से ऊपर हैं?
संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति कानून से ऊपर नहीं है। आर्टिकल 1, सेक्शन 3, क्लॉज़ 7 के अनुसार, जिस राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया गया और उसे पद से हटा दिया गया, वह कानून के तहत मुकदमे, ट्रायल और सजा के लिए जिम्मेदार हो सकता है। इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद, उन्हें किसी अन्य नागरिक की तरह कानून के अधीन लाया जा सकता है।
हालांकि, वर्तमान राष्ट्रपति को उनके संवैधानिक अधिकारों के तहत किए गए सरकारी कामों के लिए पूर्ण क्रिमिनल इम्यूनिटी दी गई है। इसका अर्थ है कि अगर कोई राष्ट्रपति अपने पद के दौरान सरकारी कर्तव्यों के हिस्से के रूप में कोई कार्रवाई करता है, तो उस पर आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता।
ट्रंप को अब तक क्या सजा मिली है?
जनवरी 2025 में न्यूयॉर्क की अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप को हश मनी मामले में बिना शर्त डिस्चार्ज (सजा की राहत) दी। इसका मतलब है कि यह सजा रिकॉर्ड में दर्ज होगी, लेकिन जेल या जुर्माने की कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस फैसले से यह साफ हुआ कि अमेरिकी कोर्ट राष्ट्रपति को दोषी ठहरा सकते हैं और उन्हें सजा भी दे सकते हैं, खासकर यदि उनका काम सरकारी कर्तव्यों से अलग हो।
प्रेसीडेंशियल इम्यूनिटी का दायरा
2024 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंशियल इम्यूनिटी के दायरे को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा राष्ट्रपति को उनके संवैधानिक अधिकारों और सरकारी जिम्मेदारियों के तहत किए गए कार्यों के लिए पूरी तरह से क्रिमिनल इम्यूनिटी प्राप्त है। लेकिन अगर राष्ट्रपति अपने निजी या पर्सनल कामों के लिए कोई कार्रवाई करते हैं, तो उस पर कानून लागू होता है। इसका मतलब है कि कानून किसी पूर्व राष्ट्रपति को सजा देने में कोई रोक नहीं लगाता।
वास्तव में, अगर कोई पूर्व राष्ट्रपति फेडरल कानून के गंभीर उल्लंघन के लिए दोषी ठहराया जाता है, तो कानून के अनुसार उसे सजा भी दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई पूर्व राष्ट्रपति मौत की सजा के लायक अपराध में दोषी पाया जाता है, तो कानूनी रूप से उसे सजा देने की पूरी अनुमति है।
प्रैक्टिकल और पॉलिटिकल चुनौतियाँ
हालांकि कानूनी तौर पर यह संभव है, लेकिन व्यावहारिक और राजनीतिक दृष्टि से राष्ट्रपति को जेल में डालना बेहद मुश्किल होता है। इसका कारण सुरक्षा और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ हैं। किसी राष्ट्रपति को यूएस सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा जीवनभर मिलती है। यदि किसी पूर्व राष्ट्रपति को जेल भेजा जाता है, तो सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में नई जटिलताएँ पैदा होती हैं।
कोर्ट और प्रेसिडेंशियल पावर
अमेरिकी कोर्ट अक्सर यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति के कार्य संविधान की सीमाओं के भीतर रहें। मौजूदा ट्रंप टैरिफ रूलिंग से यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी एग्जीक्यूटिव पॉलिसी भी अगर कानूनी अधिकारों से बाहर जाती है, तो कोर्ट उसे अमान्य घोषित कर सकता है।
संक्षेप में कहा जा सकता है कि अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को कानून से ऊपर नहीं मानता। वर्तमान राष्ट्रपति अपने सरकारी कार्यों के लिए इम्यूनिटी रखते हैं, लेकिन पद छोड़ने के बाद उन्हें कानून के अनुसार मुकदमे और सजा का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के टैरिफ मामले और हश मनी केस ने यह दिखा दिया है कि अमेरिका में कानून और संवैधानिक संतुलन राष्ट्रपति को भी नियंत्रित कर सकता है।