“तेल के लिए विकल्प तलाश रहा भारत”: सर्जियो गोर का बड़ा बयान, अमेरिका-रूस के बीच हलचल

Vin News Network
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सर्जियो गोर ने कहा कि भारत अपनी तेल खरीद के विकल्प बढ़ा रहा है, अमेरिका-रूस के बीच चर्चा तेज

अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन Pax Silica में भारत शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को शामिल हो गया। इस मौके पर भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ट्रेड डील और ऊर्जा सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि भारत अपनी तेल खरीद के विकल्पों को विविध बनाने पर काम कर रहा है और वे नई आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी विचार कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द हस्ताक्षर
सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। उन्होंने बताया, “यह डील केवल टैरिफ या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो लोकतांत्रिक देशों के सहयोग और साझा विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दोनों देशों ने लंबी समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर कर सहयोग की राह चुनी है।”

उन्होंने कहा कि Pax Silica, रक्षा साझेदारी और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देशों के लिए नए अवसर खोलेगा। इसके जरिए भारत को उभरते वैश्विक टेक्नोलॉजी और निवेश अवसरों में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।

तेल के लिए विकल्प तलाश रहा भारत
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में सर्जियो गोर ने कहा, “भारत अपनी तेल खरीद में विविधता लाने के लिए काम कर रहा है। वे वेनेजुएला से तेल खरीदने को लेकर बातचीत कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “तेल के मामले में भारत ने पहले ही समझौता किया है और अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाई है। अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी रूसी तेल खरीदे। राष्ट्रपति इस बात के लिए स्पष्ट हैं कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कर शांति स्थापित करना चाहते हैं।”

ट्रंप के दावे और रूस की प्रतिक्रिया
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने आधिकारिक रूप से ऐसा कोई बयान नहीं दिया। रूस ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत की तरफ से इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।

भारत की नीति स्पष्ट है: देश अपनी जनता के हित में सस्ता और सुरक्षित तेल खरीदता रहेगा। वहीं, वेनेजुएला से आयात बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

इस बयान के बाद अमेरिका और रूस के बीच वैश्विक ऊर्जा नीति पर हलचल बढ़ गई है, जबकि भारत अपनी रणनीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

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