एक पौधा प्रतिदिन” से देशव्यापी हरित क्रांति: शिवराज का संकल्प बना जनआंदोलन

Priyanshu Kumari
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शिवराज सिंह चौहान की पहल अब बन रही है जनभागीदारी वाला हरित आंदोलन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan के “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पाँच साल पूरे होने पर नई दिल्ली के A.P. Shinde Hall में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य उनके व्यक्तिगत संकल्प को देशव्यापी जनभागीदारी वाले हरित अभियान में बदलना था।

कार्यक्रम में मंत्री ने साफ संदेश दिया कि अब उनके मंत्रालय के हर कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण से की जाएगी। उन्होंने यह भी अपील की कि स्वागत के दौरान फूल-मालाओं या स्मृति चिन्हों की बजाय पेड़ लगाए जाएं और उसकी तस्वीर भेंट की जाए। उनका मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण को व्यवहारिक रूप मिलेगा और यह एक नई सकारात्मक परंपरा बन सकती है।

शिवराज सिंह चौहान ने “पेड़ बैंक” और “अंकुर” जैसे मंचों की अवधारणा भी सामने रखी। इसके जरिए लोग आर्थिक सहयोग देकर पौधे लगवाने में भागीदारी कर सकेंगे, खासकर वे लोग जिनके पास समय नहीं है। साथ ही, एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित करने की बात कही गई जहां लोग जन्मदिन, सालगिरह या विशेष अवसरों पर पौधे लगाने का संकल्प ले सकें।

उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि यह पहल अचानक नहीं आई, बल्कि वर्षों की पर्यावरणीय सोच का परिणाम है। 2017 की नर्मदा सेवा यात्रा और उसके बाद शुरू हुए अभियानों ने लाखों लोगों को पौधारोपण से जोड़ा। इसी कड़ी में “अंकुर अभियान” ने भी बड़ी संख्या में नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम में Sadhvi Ritambhara, Dr. Anil Joshi, Indian Council of Agricultural Research के महानिदेशक Dr. M.L. Jat और वरिष्ठ पत्रकार Ashutosh Jha सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि आम लोगों को जोड़ने के लिए मिस्ड कॉल जैसी व्यवस्था शुरू की जा सकती है, जिससे लोग आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकें। उन्होंने कहा कि अगर देश की बड़ी आबादी में से कुछ करोड़ लोग भी इस अभियान से जुड़ जाएं, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2021 से अब तक वे लगातार रोज़ एक पौधा लगाते आ रहे हैं और हजारों पौधे रोप चुके हैं। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक संकल्प नहीं बल्कि जीवनशैली बन चुकी है।

अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे छोटे-छोटे प्रयासों से शुरुआत करें और प्रकृति के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति थोड़ा योगदान दे, तो यह अभियान देश में हरित क्रांति का नया अध्याय लिख सकता है।

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