भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने भारत को लेकर एक विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron भारत दौरे पर हैं। वह प्रधानमंत्री Narendra Modi के निमंत्रण पर 17 से 19 फरवरी तक भारत में रहे और इस दौरान दिल्ली व मुंबई में कई अहम कार्यक्रमों में शामिल हुए।
इसी बीच, ख्वाजा आसिफ ने फ्रांसीसी समाचार चैनल France24 को दिए इंटरव्यू में भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ “प्रॉक्सी वॉर” चला रहे हैं। उनके अनुसार, नई दिल्ली और काबुल इस मुद्दे पर एक जैसी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत के साथ तनाव किसी बड़े टकराव में बदल सकता है और युद्ध की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने इसे एक आशंका बताया, न कि कोई तत्काल स्थिति।
इस बयान पर भारत की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
बढ़ता तनाव और कूटनीतिक माहौल
भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और क्षेत्रीय राजनीति जैसे मुद्दे अक्सर दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते रहे हैं।
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दक्षिण एशिया की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फ्रांस जैसे बड़े देश के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान इस तरह की टिप्पणी को कूटनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए हैं। इससे पहले भी वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारत पर निशाना साध चुके हैं। उस समय उन्होंने दावा किया था कि अफगानिस्तान भारत के प्रभाव में काम कर रहा है और तालिबान नेतृत्व पर भी भारत का नियंत्रण है।
उनके इस तरह के बयानों को अक्सर भारत की ओर से निराधार बताया जाता रहा है, हालांकि इस बार अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सभी की नजर भारत की प्रतिक्रिया और आने वाले कूटनीतिक कदमों पर टिकी है। ऐसे बयानों से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है, लेकिन आमतौर पर दोनों देश कूटनीतिक माध्यमों से स्थिति को संभालने की कोशिश करते हैं।
दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखना वैश्विक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता सामने आ सकती है।