समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया से जुड़े फॉर्म-7 को लेकर गंभीर आपत्तियां जताते हुए भाजपा सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है वे अधिकतर पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वर्ग से जुड़े हैं और इसे सुनियोजित राजनीतिक रणनीति बताया। सोशल मीडिया मंच X पर लंबी पोस्ट में उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों से सामने आ रहे मामलों में एक समानता दिखती है प्रभावित लोग सामाजिक रूप से कमजोर तबकों से हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जातियों और समुदायों के लोगों के नाम सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जिससे चुनावी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
सपा प्रमुख ने अपने कार्यकर्ताओं और “पीडीए प्रहरी” को सतर्क रहने का आह्वान करते हुए कहा कि हर प्रभावित मतदाता की मदद की जाए और निगरानी बढ़ाई जाए ताकि कोई भी वैध मतदाता मतदान अधिकार से वंचित न हो। उन्होंने मांग की कि सुनवाई केंद्र लोगों के घरों से नजदीक बनाए जाएं और शिकायतों की अनदेखी न की जाए। यादव ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनावी लाभ के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर रहा है और पंचायत चुनाव टालने के पीछे भी राजनीतिक आशंका काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि यदि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी जिला स्तर से लेकर उच्चतम न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उनका कहना था कि वोट का अधिकार छिनना लोकतांत्रिक अधिकार छिनने जैसा है, इसलिए यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक मुद्दा है। यादव ने अपने समर्थकों से “एक भी वोट न कटने पाए” का नारा दोहराने को कहा और इसे लंबी लड़ाई बताते हुए कहा कि पार्टी हर स्तर पर इसे उठाएगी।