टी-20 विश्व कप 2026 में भारत की पाकिस्तान पर शानदार जीत के बाद देशभर में जश्न का माहौल देखने को मिला, लेकिन इस जीत के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुकाबले को लेकर तीखी टिप्पणी की और क्रिकेट कूटनीति तथा भारत-पाक रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले मैच सिर्फ खेल नहीं बल्कि एक राजनीतिक और भावनात्मक विषय बन चुके हैं। उनके मुताबिक जब भी दोनों टीमें आमने-सामने होती हैं तो इसे राष्ट्रीय गर्व बनाकर पेश किया जाता है, जबकि असल मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऐसे मैचों के जरिए भारी आर्थिक लाभ कमाता है और यही वजह है कि तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद मुकाबले जारी रहते हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश में कई बार आतंकवादी हमले हुए, जिनमें निर्दोष नागरिकों की जान गई। उनके अनुसार ऐसे कई पीड़ित परिवारों ने सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध नहीं रखने चाहिए। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में दोनों देशों के बीच मुकाबले जारी रहते हैं और जीत के बाद बड़े पैमाने पर जश्न मनाया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल मैदान पर जीत हासिल करना ही देशभक्ति का पैमाना है या पीड़ित परिवारों के न्याय और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सांसद ने आगे कहा कि क्रिकेट जीत को “राष्ट्रीय विजय” बताना भावनात्मक प्रतिक्रिया तो हो सकती है, लेकिन इससे जमीनी हकीकत नहीं बदलती। उनके मुताबिक असली जश्न तब होना चाहिए जब आतंकवाद से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकले और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले। उन्होंने यह भी पूछा कि क्रिकेट प्रशासन से जुड़े कितने अधिकारी उन परिवारों से मिलने गए या उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। उनका आरोप था कि प्रसारण अधिकारों और विज्ञापनों से होने वाली कमाई ही सबसे बड़ा लक्ष्य बन गई है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हर बार मैच के बाद यह कहा जाता है कि भारत ने पाकिस्तान को “रौंद दिया”, लेकिन वास्तविकता में दोनों देशों के बीच तनाव और घटनाएं जस की तस बनी रहती हैं। इसलिए खेल को खेल की तरह देखने की बजाय राजनीतिक प्रतीक बना देना उचित नहीं है। उनके अनुसार सरकार और खेल संस्थाओं को संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
हालांकि दूसरी ओर खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों का एक वर्ग यह मानता है कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में मैच से बचना संभव नहीं होता क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के कार्यक्रम का हिस्सा होता है। ऐसे मुकाबले वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा देखे जाते हैं और इससे खेल की लोकप्रियता बढ़ती है। कई विशेषज्ञों का तर्क है कि खेल संबंध बनाए रखना कूटनीतिक तनाव कम करने का माध्यम भी हो सकता है।
मैदान पर हुए मुकाबले की बात करें तो भारत ने इस मैच में पाकिस्तान को 61 रन से हराकर न सिर्फ प्रतिष्ठित जीत हासिल की बल्कि सुपर-8 में भी अपनी जगह पक्की कर ली। भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों संतुलित दिखीं। खासतौर पर ईशान किशन की आक्रामक बल्लेबाजी ने मैच का रुख बदल दिया और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। देश के कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर जीत का जश्न मनाया, पटाखे फोड़े और तिरंगे लहराए।
इस तरह एक तरफ जहां क्रिकेट प्रेमी इसे खेल की बड़ी उपलब्धि मानकर खुशियां मना रहे हैं, वहीं राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या भारत-पाक क्रिकेट मुकाबलों को केवल खेल के रूप में देखा जा सकता है या इन्हें व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में परखा जाना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी के बयान ने इसी बहस को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।