दुनिया भर के वैज्ञानिक एक ऐसे शोध पर काम कर रहे हैं जो स्वास्थ्य विज्ञान की दिशा बदल सकता है। इसे “ह्यूमन एक्सपोज़ोम” कहा जाता है यानी हमारे जीवन में मौजूद सभी पर्यावरणीय, रासायनिक और जैविक प्रभावों का कुल योग, जो हमारी सेहत को प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश बीमारियों के पीछे केवल जीन नहीं बल्कि हमारे आसपास का वातावरण भी बड़ी भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जीन केवल 10-20 प्रतिशत रोग जोखिम के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि लगभग 80 प्रतिशत कारण जीवनशैली, प्रदूषण, भोजन, रसायनों और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े होते हैं। इसलिए अब वैज्ञानिक बीमारी के इलाज से ज्यादा उसके वास्तविक कारणों को समझने पर ध्यान दे रहे हैं।
इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें अमेरिका और यूरोप के शोधकर्ताओं ने अब तक हुई प्रगति साझा की। इस परियोजना का उद्देश्य एक वैश्विक नेटवर्क बनाना है जो अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य डेटा को जोड़कर बड़े स्तर पर विश्लेषण कर सके। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सेंसर, मेटाबोलोमिक्स और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जा रहा है।
परियोजना का लक्ष्य केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं है। शोधकर्ता चाहते हैं कि इसके निष्कर्षों को नीतियों में शामिल किया जाए ताकि आम लोगों को सीधे लाभ मिल सके। उदाहरण के लिए माइक्रोप्लास्टिक, कीटनाशक, खाद्य रंग और वायु प्रदूषण जैसे तत्वों का स्वास्थ्य पर संयुक्त प्रभाव समझकर नए नियम बनाए जा सकते हैं।
अफ्रीका, यूरोप, एशिया और अमेरिका में इस विषय पर क्षेत्रीय समूह बनाए जा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में एक पैन-अफ्रीकी नेटवर्क की योजना बनाई गई है ताकि महाद्वीप-स्तर पर स्वास्थ्य डेटा एकत्र किया जा सके। इसी तरह लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी सहयोग बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह परियोजना मानव जीनोम प्रोजेक्ट जितनी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। जीनोम प्रोजेक्ट ने हमें शरीर की संरचना समझने में मदद की थी, जबकि एक्सपोज़ोम प्रोजेक्ट यह बताएगा कि बीमारियां वास्तव में क्यों होती हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है।
यदि यह प्रयास सफल होता है तो चिकित्सा प्रणाली केवल इलाज पर आधारित न रहकर रोकथाम पर केंद्रित हो जाएगी। इससे बच्चों में अस्थमा और ऑटिज़्म, बुजुर्गों में मानसिक क्षय और कई पुरानी बीमारियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य का भविष्य व्यक्तिगत दवाओं और पर्यावरण-आधारित नीतियों के संयोजन में छिपा है। ह्यूमन एक्सपोज़ोम उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।