भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियामकीय निर्देशों का पालन न करने के मामले में कई बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) पर आर्थिक दंड लगाया है। यह कदम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
RBI द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, DCB बैंक और CSB बैंक पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा नवी फिनसर्व और IIFL फाइनेंस जैसी NBFC कंपनियों को भी दंडित किया गया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन को मजबूत करने के लिए की गई है।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र पर स्वयं सहायता समूहों (SHG) से संबंधित जानकारी क्रेडिट सूचना कंपनियों को उपलब्ध न कराने और कुछ खातों में वास्तविक लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित न करने के कारण दंड लगाया गया। वहीं CSB बैंक के खिलाफ बैंक प्रतिनिधियों के साथ अनुचित समझौते और ग्राहकों को शुल्क संबंधी स्पष्ट जानकारी न देने के आरोप पाए गए।
DCB बैंक के मामले में गोल्ड लोन खातों में निर्धारित लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात बनाए रखने में कमी पाई गई। IIFL फाइनेंस पर खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में सही ढंग से वर्गीकृत न करने का आरोप लगा। नवी फिनसर्व पर वसूली प्रक्रिया में आचार संहिता का उल्लंघन करने के कारण जुर्माना लगाया गया।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड का अर्थ बैंकिंग लाइसेंस पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं है, बल्कि यह संस्थानों को सुधारात्मक कदम उठाने का संदेश है।
इसी बीच, RBI ने ‘अग्रणी बैंक योजना’ (Lead Bank Scheme) के संचालन ढांचे में सुधार के लिए नए दिशानिर्देश प्रस्तावित किए हैं। 1969 में शुरू की गई यह योजना जिला स्तर पर बैंकिंग सेवाओं के समन्वय और विकास के लिए बनाई गई थी। प्रस्तावित बदलावों में योजना के उद्देश्यों को स्पष्ट करना, SLBC और LDM कार्यालयों की भूमिकाओं को सशक्त बनाना और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना शामिल है।
इन कदमों से उम्मीद है कि बैंकिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक-केंद्रित बनेगी।