69000 शिक्षक भर्ती विवाद: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का मंत्री आवास पर प्रदर्शन, आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप

Vin News Network
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लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए दृश्य
Highlights
  • आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने लखनऊ में मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट से पक्ष में फैसला आने के बावजूद सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप।

लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर जारी विवाद एक बार फिर गरमा गया है। शनिवार को आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने लखनऊ में मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की और सरकार के रवैये पर नाराज़गी जताई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन की ओर भेजा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण को लेकर उनके साथ भेदभाव हुआ है। उन्होंने बताया कि 2018 में शुरू हुई इस भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद से ही आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और नियुक्ति देने के निर्देश दिए लेकिन सरकार उस पर कार्रवाई नहीं कर रही है।

अभ्यर्थियों की चेतावनी और मांगें:
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता, रवि पटेल और अमित मौर्य ने कहा कि अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और 28 अक्तूबर को सुनवाई निर्धारित है। उनका कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से उनका पक्ष नहीं रख रही। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया में उचित सहयोग नहीं किया तो वे सामूहिक आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।

पुलिस की सख्ती पर नाराजगी:
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों से लखनऊ आने वाले उम्मीदवारों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। अम्बेडकर नगर समेत कई जिलों के अभ्यर्थियों को रात में हिरासत में लेकर आंदोलन में शामिल होने से रोका गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।

अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष की सुनवाई के लिए अनुभवी अधिवक्ता भेजे जाएं और हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें नियुक्ति दी जाए।

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