भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को भोपाल के जम्बूरी मैदान में लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन कार्यक्रम में मंच पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दतिया और सतना हवाई अड्डों सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्के का विमोचन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल के जम्बूरी मैदान में लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन कार्यक्रम के दौरान अहिल्याबाई होल्कर को पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल के जम्बूरी मैदान में ‘लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तीकरण महासम्मेलन’ कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी में शामिल हुए।
जम्बूरी मैदान में लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी आज जिस तरह शासन व्यवस्था चला रहे हैं ऐसा लगता है कि देवी अहिल्याबाई के मार्ग पर ही पूरा शासन चल रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, मध्य प्रदेश के भोपाल में आज लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300वें जयंती समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है। सबसे पहले मैं मां भारती को, भारत की मातृशक्ति को प्रणाम करता हूं। आज यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें-बेटियां हमें आशीर्वाद देने आई हैं। मैं आप सभी के दर्शन पाकर धन्य हो गया हूं। आज लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जन्मजयंती है।
140 करोड़ भारतीयों के लिए ये अवसर प्रेरणा का है। राष्ट्र निर्माण के लिए हो रहे भगीरथ प्रयासों में अपना योगदान देने का है। देवी अहिल्याबाई कहती थी कि शासन का सही अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवन में सुधार लाना होता है। आज का कार्यक्रम उनकी इस सोच को आगे बढ़ाता है।
पीएम मोदी ने कहा, आज इंदौर मेट्रो की शुरुआत हुई है, दतिया और सतना भी अब हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। ये सभी प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में सुविधाएं बढ़ायेंगे। विकास को गति देंगे और रोजगार के अनेक नए अवसर बनाएंगे। मैं आज इस पवित्र दिवस पर इन सभी कामों के लिए पूरे मध्य प्रदेश को बहुत बधाई देता हूं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनके महान व्यक्तित्व के बारे में बोलने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। देवी अहिल्याबाई प्रतीक हैं कि जब इच्छाशक्ति होती है, दृढ़ प्रतिज्ञा होती है तो परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों ना हों, परिणाम लाकर दिखाया जा सकता है। 250-300 साल पहले जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। उस समय ऐसे महान कार्य कर जाना कि आने वाली अनेक पीढियां उसकी चर्चा करें, ये कहना तो आसान है, करना आसान नहीं था।
पीएम मोदी ने कहा, लोकमाता अहिल्याबाई ने प्रभुसेवा और जनसेवा को कभी अलग नहीं माना। कहते हैं कि वे हमेशा शिवलिंग अपने साथ लेकर चलती थी। उस चुनौतीपूर्ण कालखंड में एक राज्य का नेतृत्व, कांटों से भरा ताज, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृद्धि को नई दिशा दी। देवी अहिल्याबाई भारत की विरासत की बहुत बड़ी संरक्षक थीं। जब देश की संस्कृति पर, हमारे मंदिरों, हमारे तीर्थ स्थलों पर हमले हो रहे थे, तब लोकमाता ने उन्हें संरक्षित करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित पूरे देश में हमारे अनेकों मंदिरों का, हमारे तीर्थों का पुनर्निर्माण किया। ये मेरा सौभाग्य है कि जिस काशी में लोकमाता अहिल्याबाई ने विकास के इतने काम किए, उस काशी ने मुझे भी सेवा का अवसर दिया है। आज अगर आप काशी विश्वनाथ महादेव के दर्शन करने जाएंगे, तो वहां आपको देवी अहिल्याबाई की मूर्ति भी मिलेगी।