दुबई में आयोजित 19वें एयर शो की सुबह सामान्य दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। आसमान में उठते विमान, चमकती धूप और दुनिया भर के दर्शकों की उत्सुक भीड़ इन सबके बीच भारतीय वायुसेना की उपस्थिति हमेशा की तरह आकर्षण का केंद्र थी। मगर प्रशिक्षण उड़ान के दौरान एक अनहोनी हुई और भारत के जांबाज विंग कमांडर स्याल ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। शोर, तालियाँ और तकनीक के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अचानक पसरा सन्नाटा जैसे पूरे विश्व को झकझोर गया।
वीरता की विरासत से जन्मा एक और वीर
विंग कमांडर स्याल के व्यक्तित्व को समझने के लिए उनके परिवार की पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। उनके पिता भारतीय सेना से रिटायर्ड अधिकारी हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने बेटे में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना रोपित की थी। घर में यूनिफॉर्म का सम्मान और देश के प्रति कर्तव्य सर्वोपरि माना जाता था। पिता अक्सर अपने सैन्य अनुभवों को साझा करते, और स्याल मन लगाकर उन कहानियों को सुनते रहते शायद वहीं से उनके भीतर उड़ान और सैन्य सेवा का सपना आकार ले रहा था।
स्याल की पत्नी भी भारतीय वायुसेना में अधिकारी हैं। पति-पत्नी दोनों का एक ही ध्येय देश की सेवा। घर में चर्चा अक्सर मिशनों, उड़ानों, और फील्ड ड्यूटी की जिम्मेदारियों पर होती थी, लेकिन दोनों ने अपने पेशेवर जीवन के बीच संतुलन और अत्यधिक समझदारी बनाकर रखी थी। यह एक ऐसा परिवार था जिसमें देशभक्ति सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा थी।
दुबई एयर शो: भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन
भारतीय वायुसेना ने इस एयर शो में तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान की क्षमता दर्शाने की तैयारी की थी। दुनियाभर के विशेषज्ञ भारतीय तकनीक और पायलटिंग कौशल को देखने के लिए उत्साहित थे। तेजस के प्रदर्शन का हर एक क्षण अत्यंत सटीकता, अभ्यास और साहस की मांग करता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर केवल वही पायलट भेजे जाते हैं जो अपने कौशल और शांत-चित्त स्वभाव के लिए जाने जाते हैं और विंग कमांडर स्याल उन्हीं में से एक थे।
प्रैक्टिस उड़ान के दौरान जो दुर्घटना हुई, वह क्षण भर में सबकुछ बदल गई। हादसे के कारणों की जांच तो तकनीकी दल और संबंधित विशेषज्ञ करेंगे, परंतु एक सच्चाई अटल है—विंग कमांडर स्याल ने अंतिम क्षण तक अपने विमान को सुरक्षित दिशा में मोड़ने का प्रयास किया, ताकि किसी और जान को खतरा न हो। यही एक सच्चा सैनिक करता है अपना आखिरी दम भी दूसरों की सुरक्षा के लिए लगा देता है।
गांव में पसरा मातम, पर गर्व भी उतना ही गहरा
स्याल के गांव में खबर पहुंचते ही माहौल शोक से भर गया। हर घर से रोने की आवाजें, हर चेहरे पर अविश्वास क्योंकि ऐसे युवा, साहसी और जीवंत लोगों का यूँ अचानक चले जाना किसी भी समाज को भीतर तक झकझोर देता है। लेकिन इसी मातम के बीच गर्व की भावना भी उतनी ही स्पष्ट थी। लोग कहते सुने गए “हमारा बेटा देश के लिए गया है, वह शहीद हुआ है, उसका नाम हमेशा याद रखा जाएगा।”
गांव के बुजुर्गों ने याद किया कि बचपन से ही स्याल तेज, विनम्र और अनुशासित था। स्कूल में पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल। लड़कपन से ही आसमान को निहारते देख किसी ने मज़ाक में कहा था, “ऊपर उड़ने का शौक है क्या?” और वह मुस्कुराते हुए जवाब देता “हाँ, एक दिन सच में उड़ूँगा।” शायद उसे खुद भी नहीं पता था कि उसकी यह उड़ान एक दिन पूरे देश को गौरवान्वित कर जाएगी।
परिवार का साहस: देश के प्रति अदम्य समर्पण
स्याल के पिता, जिनकी उम्र अब बढ़ चुकी है, फिर भी बेहद दृढ़ता से कहते हैं- ‘मेरा बेटा सैनिक था, उसने वही किया जो उसे सही लगा।’ उनकी आंखों में आंसू थे, पर आवाज में गर्व की ठोस गूंज। वहीं उनकी पत्नी, जो स्वयं वायुसेना की अधिकारी हैं, ने पति की अंतिम यात्रा को साहस के साथ विदाई दी। ऐसा साहस केवल वही समझ सकता है जो स्वयं भी यूनिफॉर्म का भार और जिम्मेदारियां निभाता हो।
उनकी पत्नी का बयान दिल को छू लेने वाला था- ‘हम सैनिक परिवार हैं। हाँ, दर्द है, लेकिन देश हमेशा पहले था और रहेगा। स्याल अपने कर्तव्य के लिए ही जीते थे और उसी के लिए गए।’
शहादत केवल मौत नहीं, एक संदेश है
हर शहादत देश को याद दिलाती है कि आजादी और सुरक्षा यूँ ही नहीं मिलती। उसके पीछे अनगिनत परिवारों का त्याग, सैनिकों की कठोर मेहनत और जोखिम भरे दायित्व छिपे होते हैं। विंग कमांडर स्याल की शहादत ने फिर से यह संदेश दिया है कि भारतीय सैनिक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए हर पल तैयार रहते हैं, चाहे वह जमीन हो या आसमान।
उनका जाना दुखद जरूर है, मगर उनकी वीरता, परिवार का साहस और उनके जीवन का आदर्श हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। और अंत में विंग कमांडर स्याल केवल एक नाम नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक हैं जो कहती है देश सर्वोपरि ‘ऐसे सैनिको की यादें कभी धुंधली नहीं रहती , उन्हें हमेशा याद किया जायेगा’