नई दिल्ली : केले के टेढ़े होने की सबसे बड़ी वजह है ‘फोटो-ट्रॉपिज्म’ (Phototropism) – यानी पौधों का सूर्य की ओर झुकाव। दरअसल, जब केले का पेड़ फल देने लगता है, तब केले की कलियां नीचे की ओर मुड़ी होती हैं। यानी फल की शुरुआती ग्रोथ गुरुत्वाकर्षण (gravity) की दिशा में होती है।
जैसे-जैसे फल बढ़ने लगता है, केले में मौजूद सेल्स उसे सूरज की रोशनी की ओर मोड़ना शुरू कर देते हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसमें फल धीरे-धीरे ऊपर की दिशा में बढ़ने लगता है। ऐसे में, सूरज की ओर झुकाव की वजह से ही केला सीधा न होकर ऊपर की ओर मुड़ा हुआ और टेढ़ा दिखाई देता है।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए- ज्यादातर पेड़-पौधे गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की ओर बढ़ते हैं, यानी उनकी जड़ें जमीन में नीचे की ओर और तना ऊपर की ओर बढ़ता है, लेकिन केले के पेड़ के साथ थोड़ा अलग होता है। केले का फल, जब शुरू में उगना शुरू होता है, तो वह गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर बढ़ता है। लेकिन फिर, सूर्य की रोशनी पाने के लिए वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर मुड़ने लगता है। इसी मुड़ने की प्रक्रिया को ‘निगेटिव जियोट्रॉपिज्म’ कहते हैं।
केले के आकार का उसके स्वाद से कोई लेना-देना नहीं है। उसका स्वाद मुख्य रूप से उसकी प्रजाति, मिट्टी, मौसम और पकने की अवस्था पर निर्भर करता है। चाहे केला सीधा हो या टेढ़ा, अगर वह पका हुआ है, तो मीठा और पौष्टिक ही होगा।
केले के टेढ़े होने का एक फायदा यह भी है कि यह आकार उसके अंदर के बीजों और पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने में मदद करता है। साथ ही, टेढ़े आकार की वजह से वह आसानी से छिल जाता है और खाने में ज्यादा सुविधाजनक होता है। इसके अलावा, यह हमें प्रकृति की एक खूबसूरत सीख भी देता है कि सीधा रास्ता हमेशा जरूरी नहीं होता, कभी-कभी टेढ़े रास्ते भी अपने मकसद तक पहुंचा देते हैं।