नई दिल्ली : फलों पर स्टिकर (fruit barcode number) लगाने के पीछे एक खास मकसद होता है। दरअसल, ये स्टिकर यह बताने के लिए लगाया जाता है कि फल कहां उगाया गया है, इसे उगाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया गया है। साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि फल की क्वालिटी क्या है और इसकी कीमत क्या है। ये स्टिकर पीएलयू कोड (Price look-up code) होते हैं, जो फलों की गुणवत्ता बताते हैं। इन पर एक खास नंबर लिखा होता है, जिनके अलग-अलग मतलब होते हैं।
अगर आप फल खरीद रहे हैं और उस पर 4 डिजिट वाला नंबर लिखा हुआ है, तो कोशिश करें कि आप उस फल को न खरीदें। ऐसा इसलिए क्योंकि 4 डिजिट वाले नंबर खासकर अगर उनकी शुरुआत भी 4 नंबर से ही हो, जैसे 4231 या 4056, तो इसका मतलब है कि इन फलों को उगाने के लिए कीटनाशक और केमिकल के इस्तेमाल से हुआ है।
कुछ फल ऐसे भी होते हैं, जिनपर लगे स्टिकर पर 5 डिजिट नंबर लिखे होते हैं। साथ ही इन नंबरों की शुरुआत 8 से होती है। अगर आपको फलों पर 85431 या 82512 जैसे नंबर लिखे नजर आए हैं, तो समझ जाए कि ये फल जेनेटिकली मोडिफाइड हैं। इसका मतलब है कि इन फलों को नेचुरली नहीं, बल्कि लैब में विकसित किया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या कोई ऐसा स्टिकर भी है, जो यह बताता हो कि फल पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाया गया है और सेहत के लिए बेस्ट है। दरअसल, एक स्टिकर ऐसा भी होता है। जिन स्टिकर पर 5 डिजिट वाले नंंबर होते हैं, जिनकी शुरुआत 9 से हो रही हो, जैसे कि 93435 या 95365, तो इसका मतलब है कि इन फलों को बिना केमिकल और कीटनाशक के ऑर्गेनिकली उगाया गया है।