सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर 2025 में घटकर (-) 0.32% रही। यह आंकड़ा पिछले महीने, अक्टूबर में दर्ज की गई (-) 1.21% की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल दर्शाता है। हालांकि मुद्रास्फीति दर अभी भी नकारात्मक क्षेत्र (Deflationary Territory) में है, लेकिन खाद्य वस्तुओं, विशेष रूप से दालों और सब्जियों की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर सुधार (तेजी) दर्ज की गई है, जिससे नकारात्मक दर में कमी आई है।
मुद्रास्फीति के रुझान
नवंबर 2025 में मुद्रास्फीति दर का नकारात्मक रहना मुख्य रूप से कुछ प्रमुख क्षेत्रों में कीमतों में आई कमी के कारण था। उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, नकारात्मक मुद्रास्फीति दर का प्राथमिक कारण खाद्य वस्तुओं, खनिज तेलों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बुनियादी धातुओं के विनिर्माण और बिजली आदि की कीमतों में कमी होना है।
पिछले वर्षों और महीनों से तुलना:
- नवंबर 2024: 2.16%
- अक्टूबर 2025: (-) 1.21%
- नवंबर 2025: (-) 0.32%
खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव
नवंबर के थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से पता चलता है कि हालांकि समग्र रूप से थोक बाजार में अपस्फीति (Deflation) बनी हुई है, खाद्य क्षेत्र में कीमतों में धीरे-धीरे सुधार (यानी अपस्फीति में कमी) हो रहा है।
खाद्य वस्तुएं: खाद्य वस्तुओं में अपस्फीति नवंबर में 4.16% थी, जो अक्टूबर में 8.31% थी। अपस्फीति का यह कम होना दर्शाता है कि खाद्य वस्तुओं की थोक कीमतें अब उतनी तेजी से नहीं गिर रही हैं, जितनी पहले गिर रही थीं, जिसका मतलब है कि कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं।
- सब्जियां: सब्जियों में अपस्फीति नवंबर में 20.23% रही, जबकि अक्टूबर में यह 34.97% थी।
- दालें: दालों में अपस्फीति नवंबर में 15.21% थी।
- आलू और प्याज: इनमें भी उच्च अपस्फीति जारी रही, आलू में 36.14% और प्याज में 64.70% की अपस्फीति दर्ज की गई।
विनिर्मित उत्पाद और ईंधन क्षेत्र
विनिर्मित उत्पादों के मामले में, मुद्रास्फीति में नवंबर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो अक्टूबर में 1.54% के मुकाबले 1.33% रही।
ईंधन और बिजली क्षेत्र में भी अपस्फीति जारी रही, जो अक्टूबर में 2.55% के मुकाबले 2.27% दर्ज की गई।
आरबीआई की नीति पर प्रभाव
मौजूदा वित्तीय वर्ष में कम मुद्रास्फीति के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिली है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक आरबीआई 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती कर चुका है।
आरबीआई मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) को ध्यान में रखते हुए बेंचमार्क ब्याज दरों पर निर्णय लेता है। खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों में नवंबर में रिकॉर्ड निचले स्तर 0.25% से बढ़कर 0.71% हो गई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती खाद्य कीमतें थीं।
कम मुद्रास्फीति के माहौल को देखते हुए, आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को भी घटाकर 2.6% से 2% कर दिया था। आरबीआई ने पहले अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए 5.25% कर दिया था, और कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था “दुर्लभ गोल्डीलॉक्स अवधि” में है, जिसकी विशेषता उच्च विकास और कम मुद्रास्फीति है।
आरबीआई ने पिछले सप्ताह वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान को भी 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया। गौरतलब है कि भारत ने सितंबर तिमाही में 8.2% और जून तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर दर्ज की थी। यह मजबूत विकास और कम मुद्रास्फीति का संगम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।