पटना: बिहार की राजनीति इस समय अपने सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से पीछे हटने की चर्चाओं और उनके बेटे निशांत कुमार के जेडीयू में प्रवेश ने उत्तराधिकार की जंग को तेज कर दिया है. हर किसी के जेहन में बस एक ही सवाल है कि नीतीश के बाद बिहार की कमान किसके हाथों में होगी? इस भारी सस्पेंस के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता और सांसद मनोज तिवारी ने एक ऐसी तारीख बता दी है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई है.
मनोज तिवारी का एलान
मंगलवार, 31 मार्च 2026 को मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी से जब बिहार के अगले मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले लेकिन स्पष्ट अंदाज में जवाब दिया. मनोज तिवारी ने कहा, “बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी तस्वीर 10 तारीख तक साफ हो जाएगी.”
उन्होंने किसी खास नाम का जिक्र करने से परहेज किया. उन्होंने तर्क दिया कि बीजेपी एक लोकतांत्रिक पार्टी है और यहाँ फैसले एक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं. मनोज तिवारी के इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि एनडीए (NDA) के भीतर अगले नेतृत्व को लेकर मंथन अपने अंतिम चरण में है और अगले कुछ ही दिनों में औपचारिक घोषणा संभव है.
‘बड़े भाई’ और ‘बिहार के शिल्पी’
मनोज तिवारी ने इस दौरान नीतीश कुमार के प्रति काफी सम्मान दिखाया. उन्होंने नीतीश कुमार को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि बिहार की छवि को बदलने का श्रेय उन्हीं को जाता है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “नीतीश जी हमारे नेता थे और हमेशा रहेंगे. लेकिन एक उम्र के बाद हर इंसान को निर्णय लेना पड़ता है और उन्होंने भी एक गरिमामय फैसला लिया है.” उनके इस बयान से साफ है कि भविष्य की सरकार में भले ही चेहरा बदले, लेकिन नीतीश कुमार का मार्गदर्शन एनडीए के लिए बना रहेगा.
परिवारवाद पर पलटवार कर निशांत कुमार का बचाव
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर विपक्षी दल ‘परिवारवाद’ के आरोप लगा रहे हैं. इस पर मनोज तिवारी ने कड़ा पलटवार किया. उन्होंने आरजेडी (RJD) का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग नीतीश कुमार पर परिवारवाद का आरोप लगा रहे हैं, वे खुद शीशे के घर में रहकर पत्थर फेंक रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि निशांत कुमार एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़े हैं और नीतीश कुमार ने अपने पूरे करियर में कभी परिवार को आगे नहीं बढ़ाया, इसलिए उन पर ऐसे आरोप लगाना बेबुनियाद है.
बिहार की जनता अब बेसब्री से 10 तारीख का इंतजार कर रही है. क्या कोई नया चौंकाने वाला नाम सामने आएगा या फिर जेडीयू-बीजेपी किसी पुराने अनुभवी चेहरे पर दांव लगाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा.