क्या है चागोस द्वीप, जो 211 साल बाद ब्रिटेन से आजाद हुआ

भारत ने शुरू से ही मौरीशस का समर्थन किया। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाह और संयुक्त राष्ट्र महासभा में वोटिंग के दौरान भारत ने मॉरीशस के पक्ष में वोट दिया।

Vin News Network
Vin News Network
3 Min Read
क्या है चागोस द्वीप, जो 211 साल बाद ब्रिटेन से आजाद हुआ

नई दिल्ली: ब्रिटेन ने रणनीतिक रूप से अहम हिंद महासागर के चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी। यह द्वीप वर्ष 1814 से ब्रिटिश कब्जे में था। चूंकि यह द्वीप समूह रणनीतिक रूप से इंग्लैंड के लिए अहम था, इसलिए 1965 में मॉरीशस को आजाद करने से तीन साल पहले इसे मॉरीशस सेअलग कर दिया था। 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटेन ने यहां के करीब 2,000 मूल स्थानीय निवासियों को जबरन बेदखल कर दिया। इनमें कुछ को ब्रिटेन में पनाह दी गई।

चागोस द्वीपसमूह कहां है ?
चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस से लगभग 2,200 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसमें 60 से अधिक छोटे-बड़े द्वीप हैं, जिनमें से डिएगो गार्सिया रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है। यह द्वीप मालदीव और सेशेल्स के बीच स्थित है और इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यह अमरीका और ब्रिटेन की सैन्य रणनीति के केंद्र में रहा है।

क्या हुआ समझौता ?
22 मई 2025 को हुए समझौते के तहत ब्रिटेन ने मॉरीशस को चागोस की संप्रभुता सौंप दी। हालांकि डिएगो गार्सिया को 99 वर्ष की लीज पर ले लिया, जिसके लिए वह मॉरीशस को हर वर्ष लगभग 136 मिलियन डॉलर भुगतान करेगा। यह अमरीका- ब्रिटेन दोनों देशों की सामरिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिका की दिलचस्पी क्यों ?
वर्ष 1966 में ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया को 50 वर्ष के लिए अमरीका को पट्टे पर दिया था। बदले में अमरीका ने ब्रिटेन को पोलारिस मिसाइल प्रणाली की बिक्री पर 14 मिलियन डॉलर की छूट दी। इसमें पनडुब्बियों से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं। 1971 में अमरीका ने यहां एक बड़ा सैन्य अड्डा विकसित किया, जहां से अमरीका ने ईरान, अफगानिस्तान और इराक में अभियान चलाए। अब भी यहां अमरीका, मॉरीशस और अन्य देशों के करीब 2500 कर्मचारी कार्यरत हैं।

चागो का इतिहास
1715 में फ्रांसीसी उपनिवेशवादियों ने मॉरीशस और चागोस द्वीपसमूह पर कब्जा किया था। 1814 में नेपोलियन के पतन के बाद ब्रिटेन ने इस क्षेत्र का नियंत्रण ले लिया। 1965 में ब्रिटेन ने चागोस को अलग कर उसे ‘ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र में शामिल कर लिया। 1965 से 1973 के बीच सभी नागरिकों को निर्वासित कर दिया गया, जो 18वीं सदी से यहां रह रहे थे।

कौन रहते थे इन द्वीपों पर ?
चागोस द्वीपसमूह में मुख्यतः वे लोग रहते थे, जिनके पूर्वजों को फ्रांसीसी और पुर्तगाली उपनिवेशों द्वारा मेडागास्कर और मोजाम्बिक से गुलाम बनाकर लाया गया था। उन्हें नारियल के बागानों में काम करने के लिए मजबूर किया गया था।

भारत की भूमिका
भारत ने शुरू से ही मौरीशस का समर्थन किया। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाह और संयुक्त राष्ट्र महासभा में वोटिंग के दौरान भारत ने मॉरीशस के पक्ष में वोट दिया। मॉरीशस के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों में वृद्धि होगी। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *