महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले की राहुरी विधानसभा सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह सीट भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के बाद से खाली पड़ी है। कर्डिले का करीब पांच महीने पहले देहांत हुआ था। राहुरी सीट तीन तालुकों राहुरी, पाथर्डी और अहिल्यानगर के कुछ गांवों से मिलकर बनी है।यहां दशकों से दो परिवारों के बीच सीधा मुकाबला होता आया है भाजपा का कर्डिले परिवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) का तनपुरे परिवार। 2024 के विधानसभा चुनाव में शिवाजी कर्डिले ने प्राजक्त तनपुरे को करीब 35,487 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया था। उस चुनाव में 74 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था और 2 लाख 41 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।इस बार मतदाता सूची में भी बदलाव आया है।
2024 की तुलना में 8,017 नए मतदाता जुड़े हैं और अब कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 33 हजार 183 हो गई है।तनपुरे का बदलता रुख, सियासत में नई अटकलेंइस उपचुनाव की सबसे दिलचस्प बात है प्राजक्त तनपुरे का बदलता राजनीतिक रवैया। हाल ही में उनके भगवा टोपी और भगवा उपरणा धारण करने की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं।खुद तनपुरे ने कहा है कि उपचुनाव में उनकी उम्मीदवारी तय है, लेकिन वे किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
तनपुरे राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के भांजे हैं, इसलिए उनका किसी अन्य दल में जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।दूसरी ओर पूर्व सांसद डॉ. सुजय विखे ने संकेत दिया है कि वे इस उपचुनाव की दौड़ से बाहर हैं, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि एक सर्वे में उनका नाम सबसे आगे आया है। इस बयान ने भी सियासी हलचल और बढ़ा दी है।राहुरी नगर परिषद के हालिया चुनाव में तनपुरे के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था। इससे साफ है कि विधानसभा में हार के बावजूद उनका जमीनी जनाधार अभी भी कायम है।
इसके अलावा बारामती विधानसभा सीट पर भी नजरें टिकी हैं। यह सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का गढ़ मानी जाती है। बारामती में होने वाले किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम का असर आसपास की सीटों पर भी पड़ सकता है।उत्तर प्रदेश: तीन सीटें, तीन अलग सियासी कहानियांउत्तर प्रदेश में तीन विधानसभा सीटें रिक्त हुई हैं और तीनों पर उपचुनाव की तैयारी जोरों पर है।दुद्धी (सोनभद्र): समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और आठ बार के विधायक विजय सिंह गोंड का हाल ही में लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में निधन हो गया।
आठ बार विधायक रह चुके गोंड का क्षेत्र में व्यापक प्रभाव था, इसलिए यह सीट सपा के लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।फरीदपुर (बरेली): भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। भाजपा यहां अपनी सीट बचाने की कोशिश करेगी।घोसी (मऊ): समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन से यह सीट रिक्त हुई है। सपा ने पहले ही उनके बेटे सुजीत सिंह को यहां से उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जो परिवार की विरासत आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।इन तीनों सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला होने की संभावना है।
बड़े चुनाव से पहले अहम परीक्षाउत्तर प्रदेश में लगभग एक वर्ष बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले पंचायत चुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे में ये उपचुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए जमीनी हकीकत परखने का मौका हैं। जो दल इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करेगा, वह आगामी चुनावों में मनोवैज्ञानिक बढ़त लेकर उतरेगा।चुनाव आयोग की घोषणा के बाद दोनों राज्यों में प्रचार-प्रसार और राजनीतिक समीकरण और तेजी से बदलेंगे।