ईरान गुरुवार रात एक गहरे संकट में डूब गया, जब सरकार ने देशभर में इंटरनेट और संचार सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दीं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया, जब आर्थिक बदहाली और राजनीतिक असंतोष के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के फैलने के साथ ही हिंसा में तेज़ी आई। इस बीच, इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की कि “लाइव डेटा से स्पष्ट है कि ईरान इस समय लगभग पूर्ण राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट का सामना कर रहा है।” कई इलाकों में अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल और मैसेजिंग सेवाएं भी ठप हो गईं, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया।
निर्वासित नेता की अपील और विरोध की चिंगारी
यह संकट उस समय और गहराया, जब ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रेज़ा पहलवी ने अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने दावा किया कि “लाखों ईरानियों ने आज़ादी की मांग की है” और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया, जिन्होंने ईरानी शासन को जवाबदेह ठहराने का वादा दोहराया।
पहलवी की अपील के बाद सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने न केवल आर्थिक सुधारों की मांग की, बल्कि शासन परिवर्तन के नारे भी लगाए। कई जगहों पर “तानाशाह को मौत” और “पहलवी लौटेंगे” जैसे नारे सुनाई दिए, जो आंदोलन के बढ़ते राजनीतिक स्वरूप को दर्शाते हैं।
आर्थिक संकट बना विरोध का मूल कारण
वर्तमान अस्थिरता की जड़ें ईरान की गहराती आर्थिक समस्या में हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन उस समय भड़क उठे, जब ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। मुद्रा संकट के कारण महंगाई बढ़ी, आम लोगों की क्रय शक्ति घटी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, विरोध की शुरुआत तेहरान के प्रसिद्ध बाज़ार (बाज़ार-ए-तेहरान) के बंद होने से हुई, जिसके बाद आंदोलन तेज़ी से देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। तेहरान, इस्फ़हान, अबादान, खोर्रमाबाद, केरमानशाह और लोरेस्तान जैसे शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
हिंसा, आगज़नी और सत्ता के प्रतीकों पर हमले
जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ हुआ, हिंसक घटनाओं की संख्या भी बढ़ती गई। ईरान इंटरनेशनल इंग्लिश के अनुसार, इस्फ़हान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक भवन में आग लगा दी गई। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया और उनकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
ये घटनाएं न केवल जनता के गुस्से को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी संकेत देती हैं कि प्रदर्शन अब केवल शांतिपूर्ण विरोध तक सीमित नहीं रहे। कई जगहों पर यह खुले टकराव में बदल गया है, जिससे सरकार के लिए हालात संभालना और कठिन हो गया है।
मौतों और गिरफ्तारियों के आंकड़ों पर विवाद
मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि अब तक कम से कम 42 लोगों की जान जा चुकी है और 2,270 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसके विपरीत, ईरानी सरकारी मीडिया ने कम आंकड़े पेश किए हैं।
सरकारी बयानों के अनुसार, कम से कम 21 मौतों की पुष्टि हुई है, जिनमें सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं। फार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोर्देगान में हुई गोलीबारी में दो सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई और 30 अन्य घायल हुए। वहीं, मिज़ान न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि तेहरान के बाहर एक पुलिस कर्नल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी आलोचना
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक और अवैध बल का प्रयोग किया गया, जिसमें गोलियां, मेटल-पेलेट शॉटगन, वॉटर कैनन और लाठियों का इस्तेमाल शामिल है।
इन संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक तरीके से कुचलने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
रेज़ा पहलवी का आह्वान: आंदोलन जारी रखने की अपील
रेज़ा पहलवी ने एक बार फिर ईरानी जनता को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों की सराहना की। उन्होंने युवाओं को आंदोलन की रीढ़ बताते हुए उन्हें “जनरेशन वी – विक्ट्री” कहा। उन्होंने लोगों से अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने की अपील की और कहा कि जीत जनता की होगी।
पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से संगठित रूप से सड़कों पर डटे रहने, बैरिकेड लगाने और दमन को रोकने के लिए रणनीतिक कदम उठाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने यूरोपीय नेताओं से भी अपील की कि वे ईरान में संचार सेवाएं बहाल करने के लिए तकनीकी, वित्तीय और कूटनीतिक संसाधनों का उपयोग करें।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिका की चेतावनी
ईरान में जारी संकट पर वैश्विक प्रतिक्रिया तेज़ हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरानी अधिकारी लोगों की हत्या जारी रखते हैं, तो अमेरिका “कड़ा जवाब” देगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ईरानी नागरिकों के साथ खड़ा है।
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने भी ईरानी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे “अत्यधिक बल प्रयोग” की निंदा की। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने विदेशी शक्तियों पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया और आर्थिक प्रदर्शनकारियों तथा “दंगाइयों” के बीच अंतर करने की कोशिश की।
दमन के बावजूद जारी आंदोलन
सरकारी सख्ती और संचार ब्लैकआउट के बावजूद, विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार रात तेहरान की आयतुल्ला काशानी बुलेवार्ड पर बड़ी भीड़ जमा हुई, जबकि पश्चिमी ईरान के कई शहरों में भी प्रदर्शन जारी रहे।
इराक स्थित कुर्द विपक्षी दलों ने पश्चिमी ईरान में आम हड़ताल का आह्वान किया, जिसे लगभग 30 शहरों और कस्बों में व्यापक समर्थन मिला। यह सब दर्शाता है कि ईरान में मौजूदा आंदोलन केवल अस्थायी असंतोष नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग का प्रतीक बन चुका है।
ईरान इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। आर्थिक पतन, राजनीतिक असंतोष, अंतरराष्ट्रीय दबाव और जनता का बढ़ता गुस्सा—ये सभी तत्व मिलकर देश को एक निर्णायक मोड़ पर ले आए हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट और दमन के बावजूद, सड़कों पर जारी विरोध यह संकेत देता है कि ईरानी जनता अब पीछे हटने के मूड में नहीं है।