कृषि रूपांतरण (Agricultural Transformation) विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक समाप्त हो गई। इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह रहा कि वैज्ञानिक शोध और नई तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुँचाया जाए, ताकि खेती अधिक आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बन सके।
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि देश में लगातार बदलते मौसम, घटती उपज और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब खेत स्तर पर नवाचारों का उपयोग बढ़े। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इनमें उपग्रह आधारित कृषि सलाह, रिमोट सेंसिंग, एकीकृत खेती (Integrated Farming) मॉडल, और खेती में सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) का उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि ऐसी तकनीकें न केवल किसानों की लागत कम कर सकती हैं, बल्कि उत्पादकता भी बढ़ाती हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती हैं।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि शोध संस्थानों और किसानों के बीच मजबूत संवाद आवश्यक है, ताकि अकादमिक ज्ञान सीधे खेतों तक पहुँच सके और किसान बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर निर्णय ले सकें।