इस्लामाबाद: पाकिस्तान के मशहूर राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा ने एक ताजा वीडियो में दावा किया है कि तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन नहीं चाहते थे कि ईरान-इजरायल युद्ध को रोकने के लिए होने वाली अहम बैठक पाकिस्तान में हो। रविवार (29 मार्च, 2026) को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्रियों की पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।
चीमा के अनुसार, तुर्किए चाहता था कि यह हाई-प्रोफाइल मीटिंग उसके अपने देश में हो ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे “शांतिदूत” का श्रेय मिले। उन्होंने कहा, “मजे की बात यह है कि तुर्किए हमारा दोस्त है, लेकिन उनका दिल नहीं था कि इस्लामाबाद इस बातचीत का केंद्र बने। वे चाहते थे कि दुनिया देखे कि तुर्किए मसले सुलझा रहा है, लेकिन मुस्लिम मुल्कों ने जोर दिया कि बैठक पाकिस्तान में ही होगी।”
ईरान और अमेरिका की ‘सीक्रेट’ टॉक इस्लामाबाद में?
कमर चीमा ने इस मुलाकात के बाद एक और बड़ा दावा किया है कि ईरान और अमेरिका की सीधी बातचीत (Direct Talks) अब इस्लामाबाद में होना लगभग तय है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि उन्होंने मुस्लिम देशों के सामने ईरान-यूएस वार्ता की संभावनाओं पर विस्तृत ब्रीफिंग दी है।
विश्लेषक का कहना है कि वर्तमान में पाकिस्तान की अहमियत दुनिया के लिए बढ़ गई है। लगभग 20 से 22 देशों ने ईरान युद्ध को लेकर पाकिस्तान सरकार से संपर्क साधा है। चीमा ने मशवरा दिया कि पाकिस्तान को अब ‘सार्क’ (SAARC) देशों से भी बात करनी चाहिए कि उन्हें ईरान के इस संकट से तेल, गैस और व्यापारिक जहाजों के आवागमन में क्या दिक्कतें आ रही हैं।
‘नंबर वन’ बनने की होड़
पाकिस्तानी एक्सपर्ट की मानें तो इस समय मुस्लिम जगत में नेतृत्व और वाह-वाही लूटने की होड़ मची है। तुर्किए, जो खुद को मुस्लिम उम्माह का लीडर प्रोजेक्ट करता है, पाकिस्तान के बढ़ते कूटनीतिक रसूख से थोड़ा असहज महसूस कर रहा है। हालांकि, पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि क्या वह ईरान और अमेरिका को एक मेज पर लाकर इस विनाशकारी युद्ध को रोकने में कामयाब हो पाएगा या नहीं।