दिल्ली के पीतमपुरा स्थित टुबाटा रेस्टोरेंट इन दिनों एक बड़े विवाद के घेरे में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इस रेस्टोरेंट को सुर्खियों में ला दिया है। वीडियो में दावा किया गया है कि रेस्टोरेंट स्टाफ ने एक कपल को सिर्फ इसलिए प्रवेश से मना कर दिया क्योंकि वे भारतीय पारंपरिक परिधान पहने हुए थे। इस घटना ने न केवल सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर पैदा की, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ मामला
वायरल वीडियो में एक शख्स रेस्टोरेंट स्टाफ से बहस करता दिख रहा है। उसका आरोप है कि उसे और उसकी साथी को केवल भारतीय कपड़े पहने होने की वजह से रेस्टोरेंट में एंट्री नहीं दी गई। शख्स का कहना है कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का सीधा अपमान है। वीडियो में स्पष्ट सुना जा सकता है कि शख्स कह रहा है – “क्या भारतीय कपड़े पहनना गुनाह है? आप हमारी संस्कृति का मजाक उड़ा रहे हैं।”
सोशल मीडिया पर नाराजगी
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ, लोगों में गुस्सा फैल गया। ट्विटर (अब X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #BoycottTubataRestaurant और #RespectIndianCulture जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूज़र्स ने रेस्टोरेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, तो कुछ ने इसे ‘शहरी एलीटिज्म’ और ‘संस्कृति विरोधी’ मानसिकता का उदाहरण बताया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा – “भारतीय परिधान पहनना गर्व की बात है, इसे अपमानित करना अस्वीकार्य है। इस मामले की जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।” कपिल मिश्रा ने दिल्ली पर्यटन विभाग और पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं।
रेस्टोरेंट की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद टुबाटा रेस्टोरेंट की ओर से सफाई दी गई। रेस्टोरेंट प्रबंधन का कहना है कि यह घटना “ड्रेस कोड पॉलिसी” से जुड़ी हुई थी, लेकिन किसी भी तरह से भारतीय संस्कृति का अपमान करने का इरादा नहीं था।
उन्होंने एक बयान में कहा – “हम अपने सभी ग्राहकों का स्वागत करते हैं, चाहे वे किसी भी पोशाक में हों। यह घटना गलतफहमी का परिणाम हो सकती है। हम मामले की आंतरिक जांच कर रहे हैं।”
ड्रेस कोड पर बहस
इस घटना ने एक पुरानी बहस को फिर से जगा दिया है – क्या रेस्टोरेंट और क्लब्स का ड्रेस कोड भारतीय पारंपरिक कपड़ों के खिलाफ है?
कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर वेस्टर्न ड्रेस में एंट्री दी जा सकती है, तो फिर साड़ी, कुर्ता-पजामा या सलवार-कमीज़ पर रोक क्यों?
फैशन और संस्कृति के बीच यह टकराव सोशल मीडिया पर एक गरमागरम चर्चा का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
पीतमपुरा के कई स्थानीय निवासियों ने इस घटना पर नाखुशी जताई। एक निवासी ने कहा – “दिल्ली जैसे शहर में, जहां हर धर्म और संस्कृति के लोग रहते हैं, वहां भारतीय कपड़ों पर रोक लगाना बेहद शर्मनाक है।”
दूसरी ओर, कुछ लोगों ने कहा कि अगर यह रेस्टोरेंट की तय पॉलिसी है तो ग्राहकों को पहले से इसकी जानकारी होनी चाहिए थी।
कानूनी पहलू
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई रेस्टोरेंट बिना वैध कारण के किसी ग्राहक को प्रवेश से रोकता है, तो यह भेदभाव के दायरे में आ सकता है। भारतीय संविधान में नागरिकों को उनकी संस्कृति और पहनावे की स्वतंत्रता दी गई है, और इस पर रोक लगाना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
जांच का इंतजार
फिलहाल, दिल्ली सरकार और पुलिस की जांच जारी है। कपल की ओर से भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।