वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को लेकर अब तक का सबसे बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष महीनों तक नहीं खिंचेगा, बल्कि कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। खास बात यह है कि अमेरिका ने इस बार जमीनी सेना उतारने की जरूरत से भी इनकार किया है।
10 दिन की समय सीमा और 15 सूत्रीय प्रस्ताव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खोलने के लिए 10 दिन का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक 15 सूत्रीय समझौता प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल प्रोग्राम पर लगाम लगाने जैसी शर्तें शामिल हैं।
मरीन और एयरबोर्न सैनिकों की तैनाती
भले ही विदेश मंत्री रुबियो जमीनी युद्ध की संभावना को नकार रहे हों, लेकिन पेंटागन की गतिविधियां कुछ और ही इशारा कर रही हैं। मार्च के अंत तक हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों का पहला दल एक बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए मिडिल ईस्ट पहुँचने वाला है। इसे जरूरत पड़ने पर ‘प्लान बी’ के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान का कड़ा रुख: “हमलों के बीच बातचीत नामुकिन”
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि सैन्य हमलों के बीच किसी भी तरह की बातचीत स्वीकार्य नहीं है। गौरतलब है कि इस भीषण संघर्ष में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अमेरिका को भी अपने 13 सैनिकों को खोना पड़ा है।