अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच एक सख्त संदेश दिया है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अगर ईरान की सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करेगी या उन्हें मारने की कोशिश करेगी, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। ट्रंप ने लिखा, “हम पूरी तरह तैयार हैं और लॉक एंड लोडेड हैं।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में आर्थिक संकट के कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले हफ्ते से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में कम से कम सात लोग मारे गए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। हिंसा कई शहरों में फैल गई है, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान में दुकानदारों से हुई थी, जो मुद्रा के तेज गिरावट और महंगाई से नाराज थे। अब यह विरोध कई प्रांतों तक फैल गया है। मंगलवार को कम से कम दस विश्वविद्यालयों के छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया, जिससे आंदोलन और मजबूत हो गया। कई इलाकों में बाजार बंद रहे, और सरकार ने ठंड के मौसम का हवाला देकर छुट्टी घोषित कर दी, जिससे देश के बड़े हिस्से में कामकाज ठप हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कई जगहों पर झड़पें हिंसक हो गईं। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और वाहनों को आग लगा दी। एजेंसी का दावा है कि कुछ हथियारबंद लोग प्रदर्शनों का फायदा उठा रहे थे, और बाद में अधिकारियों ने कई लोगों से हथियार जब्त किए।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की इच्छा जताई है। राज्य टीवी पर एक कार्यक्रम में उन्होंने आर्थिक समस्याओं से लोगों की नाराजगी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “इस्लामी नजरिए से अगर हम लोगों की आजीविका का समाधान नहीं करेंगे, तो हमें नरक जाना पड़ेगा।” पेजेश्कियन ने लोगों से एकजुटता की अपील भी की।
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं, इसका मुख्य कारण हैं। दिसंबर में आधिकारिक महंगाई दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। मुद्रा रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई है। इसके अलावा, जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन का संघर्ष हुआ था, जिसमें अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इस युद्ध ने ईरान की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर दिया और लोगों में असंतोष बढ़ा दिया।
ये प्रदर्शन ईरान में तीन साल में सबसे बड़े हैं। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोधों की याद दिलाते हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर नजर रखे हुए है। ट्रंप की चेतावनी से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।