अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने भारत, चीन और बांग्लादेश सहित दुनिया के 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ नई व्यापारिक जांच शुरू कर दी है। यह जांच अमेरिका के व्यापार कानून Section 301 के तहत की जा रही है। इस कानून के जरिए अमेरिका किसी भी देश पर अतिरिक्त टैरिफ यानी आयात कर बढ़ाने या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई कर सकता है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पिछले महीने Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन की ओर से पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। अदालत के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अब ट्रंप प्रशासन नई जांच के जरिए फिर से अपने व्यापारिक दबाव की रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी देश की व्यापार नीतियों में गड़बड़ी या अनुचित व्यवहार पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इसमें आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना, व्यापारिक प्रतिबंध लागू करना या अन्य आर्थिक उपाय शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस जांच का मुख्य उद्देश्य उन देशों की पहचान करना है जिनकी उत्पादन क्षमता बहुत अधिक है या जो लगातार अमेरिका के साथ बड़े व्यापारिक सरप्लस के साथ सामान बेच रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि ऐसे हालात में उसके घरेलू उद्योगों को नुकसान हो सकता है और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।
इस जांच के दायरे में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इनमें China, European Union, India, Japan, South Korea और Mexico जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश शामिल हैं। इन देशों के साथ अमेरिका का व्यापारिक संबंध काफी बड़ा है और कई क्षेत्रों में व्यापार असंतुलन को लेकर पहले भी विवाद होता रहा है।
इसके अलावा जांच में एशिया और यूरोप के कई अन्य देशों को भी शामिल किया गया है। इनमें Taiwan, Vietnam, Thailand, Malaysia, Cambodia, Singapore, Indonesia, Bangladesh, Switzerland और Norway जैसे देश भी शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार Canada इस सूची में शामिल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंध अपेक्षाकृत संतुलित हैं, इसलिए उसे इस जांच से बाहर रखा गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि वह एक अलग जांच प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस जांच का उद्देश्य उन उत्पादों के आयात को रोकने की संभावना का अध्ययन करना है जो कथित तौर पर जबरन मजदूरी के जरिए बनाए जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह जांच 60 से अधिक देशों को कवर कर सकती है।
इससे पहले भी अमेरिका चीन के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कर चुका है। चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य उत्पादों पर अमेरिका ने कड़े कदम उठाए थे। यह कार्रवाई Uyghur Forced Labor Protection Act के तहत की गई थी, जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden के कार्यकाल में लागू किया गया था।
अमेरिका का आरोप है कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिम समुदाय के लोगों से जबरन मजदूरी कराई जाती है और उसी श्रम से बने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जाते हैं। हालांकि China इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और इन्हें राजनीतिक प्रचार करार देता है।
ट्रंप प्रशासन ने इस नई जांच प्रक्रिया के लिए एक तेज समयसीमा भी तय की है। अधिकारियों के अनुसार 15 अप्रैल तक आम जनता, उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद लगभग 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न पक्ष अपनी दलीलें पेश कर सकेंगे।
जांच प्रक्रिया को तेज गति से पूरा करने की योजना है और उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई तक इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन देशों के खिलाफ टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य अमेरिका के बढ़ते व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यह कहता रहा है कि कई देश अनुचित व्यापारिक नीतियों के जरिए अमेरिकी बाजार का फायदा उठा रहे हैं।
दरअसल Section 301 अमेरिका के व्यापार कानून Trade Act of 1974 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब अमेरिका को लगता है कि कोई देश व्यापार में अनुचित या भेदभावपूर्ण नीतियां अपना रहा है।
इस कानून के तहत अमेरिकी सरकार किसी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू कर सकती है। जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उस देश के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने, आयात सीमित करने या अन्य आर्थिक प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी अमेरिका के व्यापार विभाग के अंतर्गत आने वाला Office of the United States Trade Representative करता है, जिसे संक्षेप में USTR कहा जाता है। यही संस्था जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है और सरकार को अपनी सिफारिशें देती है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस जांच पर टिकी हुई है, क्योंकि यदि अमेरिका इन देशों पर नए टैरिफ लगाता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।