अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए यात्रा प्रतिबंधों (Travel Ban) में भारी विस्तार किया है। मंगलवार को जारी नई घोषणा के अनुसार, प्रतिबंधित देशों की सूची में 20 नए नाम जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल प्रभावित देशों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो स्क्रीनिंग, सुरक्षा जांच और सूचना साझा करने के मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं।
19 देशों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कुल 40 देशों में से 19 देशों के नागरिकों पर अमेरिका आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस ‘पूर्ण प्रतिबंध’ की सूची में युद्धग्रस्त सीरिया से लेकर अफ्रीकी देश बुर्किना फासो तक शामिल हैं। विशेष रूप से, फिलिस्तीनी प्राधिकरण (Palestinian Authority) के पासपोर्ट धारकों को भी इस सख्त प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।
पूर्ण प्रतिबंध का सामना करने वाले देशों की सूची इस प्रकार है:
- 1.सीरिया
- 2. बुर्किना फासो
- 3. माली
- 4. नाइजर
- 5. दक्षिण सूडान
- 6. लाओस
- 7. सिएरा लियोन
- 8. म्यांमार
- 9. चाड
- 10. कांगो गणराज्य
- 11. इक्वेटोरियल गिनी
- 12. हैती
- 13. इरिट्रिया
- 14. ईरान
- 15. लीबिया
- 16. सोमालिया
- 17. सूडान
- 18. यमन
- 19. अफगानिस्तान
आंशिक प्रतिबंध और प्रभावित क्षेत्र
पूर्ण प्रतिबंध के अलावा, ट्रंप प्रशासन ने कई अन्य देशों पर ‘आंशिक प्रतिबंध’ भी लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का सबसे गहरा असर अफ्रीकी देशों और कैरिबियाई द्वीपों पर पड़ा है। नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट और सेनेगल जैसे प्रमुख अफ्रीकी देशों के नागरिकों को अब अमेरिका प्रवेश में कड़ी बाधाओं का सामना करना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि सेनेगल ने अगले वर्ष अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होने वाले फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है, ऐसे में इन प्रतिबंधों का असर खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों पर भी पड़ सकता है।
आंशिक प्रतिबंधों की सूची में अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, तंजानिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और पोलिनेशियाई देश टोंगा को भी शामिल किया गया है। आलोचकों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का निशाना मुख्य रूप से अश्वेत बहुल और अफ्रीकी राष्ट्रों को बनाया गया है।
प्रतिबंधों का आधार और सुरक्षा चिंताएं
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार उन देशों को लक्षित करता है जिनके पास सुरक्षित स्क्रीनिंग और सूचना साझा करने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, यह कदम अमेरिका को बाहरी सुरक्षा खतरों और सार्वजनिक सुरक्षा के जोखिमों से बचाने के लिए उठाया गया है। हाल ही में थैंक्सगिविंग सप्ताहांत के दौरान दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर हुई गोलीबारी में एक अफगान नागरिक की गिरफ्तारी के बाद इन प्रतिबंधों को और अधिक सख्त करने के संकेत दिए गए थे।
प्रशासन का मानना है कि उन विदेशियों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए जो देश की संस्कृति, सरकारी संस्थानों या इसके बुनियादी सिद्धांतों को अस्थिर या कमजोर करने का इरादा रखते हैं। राष्ट्रपति की उद्घोषणा में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रवेश मानकों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
ये नए नियम 1 जनवरी से प्रभावी होंगे। जहां एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बता रही है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर देशों को प्रतिबंधित करना अनुचित है और इससे हजारों निर्दोष यात्रियों, छात्रों और परिवारों को परेशानी होगी। यह कदम वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि और उसके कूटनीतिक संबंधों को किस तरह प्रभावित