सर्जियो गोर ने सोमवार को औपचारिक रूप से भारत में अमेरिकी राजदूत के पद की जिम्मेदारी संभाली और भारत-अमेरिका के साझेदारी के महत्व को रेखांकित किया। गोर ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प निकट भविष्य में भारत का दौरा कर सकते हैं।
राजदूत ने अपने नए पद संभालने के तुरंत बाद कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंध व्यक्तिगत स्तर पर बहुत मजबूत हैं। उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनिया के कई देशों की यात्रा कर चुका हूं और यह सत्यापित कर सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती वास्तविक है। सच्चे मित्र भले असहमत हों, लेकिन अंततः अपने मतभेदों को सुलझा लेते हैं।”
गोर ने भारत को “एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार” बताया और कहा कि वे गहरी सम्मान और स्पष्ट मार्गदर्शन के साथ भारत आए हैं, ताकि दोनों देशों के संबंध को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को “दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी लोकतंत्रों के बीच सहयोग” करार दिया और कहा कि उनका उद्देश्य इस रिश्ते को कई क्षेत्रों में अगले स्तर तक ले जाना है।
ट्रम्प के भारत दौरे की संभावना
राजदूत ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रम्प भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रम्प ने अपनी पिछली भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों के बारे में सकारात्मक रूप से बात की। गोर ने आशा जताई, “मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति अगले एक-दो वर्षों में भारत आएंगे।” उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ट्रम्प की देर रात की कॉल करने की आदत समयानुसार भारत-अमेरिका समय अंतर के लिए उपयुक्त हो सकती है।
भारत अमेरिका साझेदारी की केंद्रीय भूमिका
गोर ने भारत की वैश्विक रणनीति में केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “कोई भी साझेदार भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है।” राजदूत ने साझेदारी को “सच्चे रणनीतिक साझेदार” के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि दोनों देश अपनी ताकत, नेतृत्व और आपसी सम्मान के साथ तालमेल बैठा सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से संपर्क में हैं और अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को भारत के साथ अंतिम रूप देना है। इसके अतिरिक्त, गोर ने अमेरिकी नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल ‘Pax Silica’ का उल्लेख किया और बताया कि यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर उन्नत विनिर्माण तक के क्षेत्रों को कवर करती है। उन्होंने कहा कि भारत को भी इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।
भारत में गोर की पहली छाप
गोर 9 जनवरी को भारत पहुंचे और उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “भारत में वापस आकर अच्छा लग रहा है” और दोनों देशों के लिए “अद्भुत अवसर” आने की संभावना पर चर्चा की।
हालांकि, गोर का कार्यकाल एक चुनौतीपूर्ण समय में शुरू हुआ है। रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिज जैसे कई क्षेत्रों में हालिया धीमी गति के बाद नई गति की आवश्यकता है।
व्यापार और शुल्क पर दबाव
वाणिज्यिक संबंधों में सबसे बड़ा विवाद व्यापार और टैरिफ का है। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर देशों के लिए भारी शुल्क लगाने का कानून मंजूर किया। भारत पहले से ही अमेरिकी टैरिफ के दबाव में है, जिसमें अगस्त 2025 में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क शामिल है, और इसका एक हिस्सा विशेष रूप से भारत की ऊर्जा आयात पर आधारित है।
इस पृष्ठभूमि में, गोर का जोर संवाद, रणनीतिक साझेदारी और व्यक्तिगत कूटनीति पर है। यह संकेत देता है कि उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करना और सहयोग के रास्ते पर वापस लाना है।
राजनयिक दृष्टिकोण और भविष्य की दिशा
गोर ने यह स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका साझेदारी केवल औपचारिक समझौतों या व्यापारिक लेनदेन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते में सांस्कृतिक, सुरक्षा, तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग भी शामिल है। राजदूत ने विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में दोतरफा लाभकारी सहयोग, रक्षा उत्पादन, नई ऊर्जा परियोजनाओं और डिजिटल प्रौद्योगिकी में साझा नवाचार पर जोर दिया।
राजदूत ने कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य भारत और अमेरिका के बीच विश्वास, पारदर्शिता और उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क को और मजबूत करना है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में उच्चस्तरीय दौरे और बैठकों के जरिए दोनों देश सभी क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देंगे।
अमेरिका की वैश्विक रणनीति में भारत की भूमिका
गोर ने कहा कि अमेरिका की वैश्विक रणनीति में भारत की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्थिर और विश्वसनीय भागीदार के रूप में विश्व मंच पर अमेरिका की योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अमेरिका और भारत की साझेदारी केवल आर्थिक या सैन्य क्षेत्रों तक सीमित नहीं है; यह वैश्विक स्थिरता, तकनीकी प्रगति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम है।
गोर के आगमन और उनके पहले बयानों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका भारत के साथ मजबूत संबंध बनाने, लंबित मुद्दों का समाधान करने और दोनों देशों के साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति ट्रम्प के संभावित दौरे, रणनीतिक पहलों जैसे Pax Silica, और व्यापार समझौतों पर बातचीत इस दिशा में अहम कदम होंगे।
राजदूत का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भारत-अमेरिका संबंध केवल औपचारिक मित्रता नहीं, बल्कि गहरी कूटनीतिक समझ और व्यक्तिगत भरोसे पर आधारित सच्ची दोस्ती है। भविष्य के महीनों में इस साझेदारी में कई क्षेत्रों में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा सकती है।