पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्य में तैनात न्यायिक अधिकारियों पर बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को हिंसक हमला हुआ. प्रदर्शनकारियों ने जिला और सत्र न्यायाधीशों को दोपहर से रात तक बंधक बनाए रखा और बाद में उनके वाहनों पर पत्थर व लाठियों से हमला किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच ने मामले की सुनवाई की. सीजेआई ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य में अधिकारी राजनीतिक भाषा बोल रहे हैं. कोर्ट ने इसे ‘न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर चोट’ और ‘सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती’ करार दिया.
सुरक्षा व्यवस्था: चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि न्यायिक अधिकारियों के कार्यस्थल, निवास और आवश्यकतानुसार उनके परिवार को केंद्रीय बलों (Central Forces) की सुरक्षा दी जाए.
भीड़ पर नियंत्रण: जहाँ दावों का निपटारा हो रहा है, वहां एक समय में 5 से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है.
कारण बताओ नोटिस: कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी, मालदा के डीएम और एसपी को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए.
निष्पक्ष जांच: चुनाव आयोग को घटना की जांच CBI या NIA जैसी निष्पक्ष एजेंसी से कराने और रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का आदेश दिया गया है.
ऑनलाइन उपस्थिति: संबंधित अधिकारियों को 6 अप्रैल को होने वाली ऑनलाइन सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की वोटर लिस्ट से बाहर किए गए करीब 50 लाख लोगों की आपत्तियों की जांच के लिए इन जजों को नियुक्त किया है. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य में ‘कानून-व्यवस्था ध्वस्त’ होने की टिप्पणी हटाने का अनुरोध किया, जिस पर कोर्ट ने इसे साबित करने की चुनौती दी.