भारतीय किसान पारंपरिक रूप से धान की खेती करते आए हैं, लेकिन बदलते समय और बाज़ार की मांग को देखते हुए खेती में बदलाव जरूरी हो गया है. आज ऐसे मॉडल की ज़रूरत है जो किसानों की आमदनी बढ़ा सके और खेती को टिकाऊ भी बनाए. इस दिशा में धान के साथ केकड़ा पालन एक नई और कारगर तकनीक बनकर उभरी है.
क्या है धान-केकड़ा सह-पालन मॉडल?
यह मॉडल ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ का हिस्सा है, जिसमें किसान एक ही जमीन, पानी और श्रम का इस्तेमाल कर दो तरह की खेती कर सकते हैं, धान और केकड़ा खेत में पहले से मौजूद पानी का ही इस्तेमाल केकड़े पालने के लिए किया जाता है, जिससे खर्च में भी कमी आती है.
क्यों फायदेमंद है केकड़ा पालन?
केकड़े की मांग देश और विदेश दोनों जगह तेजी से बढ़ी है. होटल, रेस्तरां और सुपरमार्केट में मीठे पानी के केकड़े खूब बिकते हैं. धान के खेतों में पानी भरा होता है, जो केकड़ों के लिए प्राकृतिक आवास जैसा होता है. इसके लिए किसी अतिरिक्त तालाब की जरूरत नहीं होती. इससे किसान एक ही सीजन में दो बार कमाई कर सकते हैं.
कैसे करें खेत की तैयारी?
धान बोने से पहले खेत के चारों तरफ 1.5 से 2 फीट ऊंची मजबूत मेड़ बनाई जाती है, ताकि केकड़े बाहर न निकल सकें. खेत में 30 से 50 सेमी तक पानी बनाए रखना जरूरी होता है. साथ ही जल निकासी के लिए रास्ता भी तैयार करना होता है.
कौन से केकड़े सबसे बेस्ट
‘मड क्रैब’ नाम की प्रजाति सबसे सही मानी जाती है. एक वर्ग मीटर क्षेत्र में 1 से 3 केकड़े छोड़े जा सकते हैं. इन्हें ट्रैश फिश, उबला चिकन या शेलफिश जैसे आहार दिए जाते हैं. केकड़ों को उनके वजन के अनुसार 5 से 8 प्रतिशत चारा प्रतिदिन देना चाहिए. पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि उनकी ग्रोथ सही हो.
कब और कैसे करें कटाई व बिक्री?
5 से 6 महीनों में केकड़े इतने बड़े हो जाते हैं कि उन्हें बाजार में बेचा जा सके. भारतीय बाजार में इनकी कीमत 800 से 1,500 रुपए प्रति किलो तक होती है, जिससे किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है.
और भी हैं कई फायदे
धान और केकड़ा दोनों से एक ही जमीन से दो तरह की कमाई होती है. इसके अलावा, केकड़े मच्छर और अन्य कीट खा जाते हैं, जिससे कीटनाशकों की जरूरत घटती है. दूसरी ओर केकड़ों को पालने के लिए, खेत का ही पानी इस्तेमाल होता है, अलग तालाब बनाने की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा, बढ़ती मांग के चलते बिक्री में आसानी होती है और दाम बेहतर मिलते हैं. सबसे बड़ी बात कि यह मॉडल पर्यावरण के अनुकूल है और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाता है.
क्या रखें सावधानियां?
केकड़े और धान दोनों की ज़रूरतों का संतुलन बनाकर खेती करें. अधिक रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों से बचें, क्योंकि ये केकड़ों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं. खेत की मेड़, जल निकासी और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें, ताकि केकड़े खेत से बाहर न जा सकें.