प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह दिल्ली स्थित कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन में आयोजित क्रिसमस प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर चर्च में शांति, प्रेम और करुणा के संदेश को केंद्र में रखा गया। प्रार्थना सभा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्रिसमस का भाव समाज में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “दिल्ली के कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन में क्रिसमस की सुबह की प्रार्थना सभा में शामिल हुआ। यह सेवा प्रेम, शांति और करुणा के शाश्वत संदेश को दर्शाती है। क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और सदाशयता को प्रेरित करे।”
प्रधानमंत्री की यह उपस्थिति हाल के वर्षों में ईसाई समुदाय के साथ उनके लगातार संवाद और संपर्क की कड़ी के रूप में देखी जा रही है। सरकार के स्तर पर विभिन्न धार्मिक समुदायों के साथ जुड़ाव और आपसी सम्मान के संदेश को आगे बढ़ाने के प्रयासों के तहत प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर ईसाई कार्यक्रमों में भाग लिया है।
वर्ष 2023 में ईस्टर के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली स्थित सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उस दौरान उन्होंने चर्च के पादरियों और श्रद्धालुओं से बातचीत की थी और सामाजिक सद्भाव, एकता और आपसी समझ के महत्व पर जोर दिया था। इसी वर्ष क्रिसमस के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर ईसाई नेताओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम की मेजबानी भी की थी। उस आयोजन में संवाद, समावेशिता और आपसी सम्मान जैसे विषयों को प्रमुखता से रखा गया था।

प्रधानमंत्री का यह संवाद वर्ष 2025 में भी जारी रहा। इस साल उन्होंने केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के आवास पर आयोजित क्रिसमस डिनर में भाग लिया। इसके अलावा, वह कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इन सभी कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री की उपस्थिति को ईसाई समुदाय के साथ निरंतर संपर्क और विश्वास निर्माण के प्रयास के रूप में देखा गया।
इन लगातार आयोजनों और भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री का फोकस विभिन्न समुदायों के बीच शांति, करुणा और सामाजिक सौहार्द के संदेश को मजबूत करने पर बना हुआ है। उनके वक्तव्यों और सहभागिता में बार-बार यह बात सामने आई है कि विविधता में एकता भारत की ताकत है और सभी धर्मों का सम्मान देश की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
इस बीच, देशभर में क्रिसमस को लेकर उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक बाजारों, चर्चों और सार्वजनिक स्थानों को रंग-बिरंगी रोशनी, घंटियों और सजावटी झालरों से सजाया गया है। सड़कों और दुकानों के बाहर सांता क्लॉज की स्लेज, चमकते सितारे और क्रिसमस ट्री आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। खरीदारी करने वालों की भीड़ और उत्सव की तैयारियों से बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है।
क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाया जाता है और यह ईसा मसीह के जन्म की स्मृति में मनाया जाने वाला प्रमुख ईसाई पर्व है। यह त्योहार प्रेम, शांति और मानवता का संदेश देता है। इस दिन परिवार और मित्र एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
सर्दियों के मौसम में मनाया जाने वाला यह पर्व लोगों के बीच आपसी गर्मजोशी और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। क्रिसमस कैरोल गाए जाते हैं, बच्चे सांता क्लॉज की पोशाक में नजर आते हैं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहायता और दान की परंपरा भी निभाई जाती है।
भारत समेत दुनिया भर में क्रिसमस को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह पर्व सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रार्थना सभा में उपस्थिति और उनका संदेश इसी व्यापक भावना को रेखांकित करता है, जिसमें शांति, प्रेम और करुणा को समाज की बुनियाद बताया गया है।