ईरान जंग में चीन की चुप्पी का राज: तेल सप्लाई बचाने की जद्दोजहद

Vin News Network
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चीन चुप क्यों? ईरान से 80% तेल, होर्मुज बंद तो तबाही

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले जारी हैं। लेकिन चीन नाममात्र की निंदा करके खामोश हो गया। ‘ड्रैगन’ दादागिरी भूलकर सतर्कता अपना रहा। कारण साफ ईरान से सस्ता तेल और होर्मुज जलडमरूमध्य।

ईरान तेल: चीन की लाइफलाइन
चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक। ईरान से 80% निर्यात खरीदता। 2025 में रोज 13.8 लाख बैरल मिले कुल आयात का 13-14%। पश्चिमी सैंक्शंस के बावजूद रियायती दरों पर तेल आता रहा। हमलों ने सप्लाई चेन हिला दी।

चीनी रिफाइनरियां सतर्क। ईरानी तेल कम खरीद रही। रूस से डिस्काउंट तेल बढ़ाया। सऊदी अरब भी सप्लाई करता। लेकिन ईरान का सस्ता तेल अनोखा था। लंबा संकट झेलना मुश्किल।

होर्मुज जलडमरूमध्य: असली खतरा
यह 34 किमी चौड़ा रास्ता दुनिया का सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट। मिडिल ईस्ट से चीन के 44% तेल आयात यहीं से। रोज 20 मिलियन बैरल गुजरते। ईरान बंद करे तो तबाही।

सऊदी, UAE, कतर का तेल भी रुक जाएगा। चीन की फैक्ट्रियां ठप। ईंधन महंगा। ट्रांसपोर्ट चेन बिगड़ेगी। अमेरिका ने चीन से कहा—ईरान को रोकें।

25 साल का सौदा दांव पर
2021 में ईरान-चीन ने 25 साल का मेगा डील साइन की। बेल्ट एंड रोड का हिस्सा। तेल, गैस, रोड, रेलवे सब शामिल। ईरान ने चीन को मीलों जमीन दी। बदले में निवेश का वादा। अब युद्ध ने सब खतरे में डाल दिया।

ईरान की बड़ी चूक
एवेलॉन इंटेलिजेंस के बालाकृष्णन कहते हैं—ईरान ने अरब ठिकानों पर मिसाइलें मारकर भूल की। सऊदी, UAE जैसे तटस्थ देश नाराज। US-Israel गठबंधन मजबूत। चीन का बैलेंसिंग गेम बिगड़ा।

ट्रंप का प्रेशर बढ़ा
ट्रंप-नेटन्याहू ईरान को कुचलने को तैयार। चीन जाने वाले तेल पर 25% टैरिफ धमकी। बीजिंग जवाबी कदम नहीं ले रहा—अपनी ही सप्लाई बिगड़ेगी।

रूस आया काम
रूस सस्ते तेल से चीन बचा रहा। यूक्रेन वॉर के बाद रूसी तेल रिकॉर्ड सस्ता। ईरान की कमी भर रहा। लेकिन रूस की क्षमता सीमित। लंबा युद्ध झेलना कठिन।

चीनी अर्थव्यवस्था पर असर
तेल महंगा तो फैक्ट्रियां महंगी। US टैरिफ वॉर पहले से दबाव। होर्मुज रुका तो महंगाई आसमान छुएगी। निर्यात सस्ता नहीं रहेगा।

चीन की रणनीति क्या?
बीजिंग ने हमलों की निंदा की। शांति अपील की। सैन्य मदद से दूर। बैकग्राउंड डिप्लोमेसी पर फोकस। अरब देशों से तेल डील मजबूत कर रहा। रूस पर निर्भरता बढ़ा रहा।

वैश्विक तेल बाजार हिला
तेल 80 डॉलर/बैरल पहुंचा। होर्मुज पर नजर। ईरान मिसाइलें दागे तो 120 डॉलर संभव। भारत जैसे देश भी प्रभावित।

चीन ‘दादा’ बनने का सपना देख रहा। लेकिन तेल संकट ने हाथ बांध दिए। ईरान बचाना चाहता, अपनी अर्थव्यवस्था पहले। साइलेंस गोल्ड। युद्ध खत्म होने तक चुप्पी सही।

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