भारत के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में अपने “10 मिनट में डिलीवरी” वाले प्रचार और ऐप फीचर्स में बदलाव किए हैं। यह कदम केंद्रीय श्रम मंत्रालय की चेतावनी और राइडर्स की सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर उठाए गए सवालों के बाद आया।
सरकार ने कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट संदेश दिया गया और गिग वर्कर्स यूनियनों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ध्यान देने को कहा गया। मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म्स से अनुरोध किया कि वे सुपर-तेज डिलीवरी के प्रचार से बचें, जिससे कर्मचारियों पर दबाव न पड़े।
पिछले कुछ महीनों में डिलीवरी पार्टनर्स की नाराजगी बढ़ी थी। 2025 के अंत तक कई बड़े शहरों में खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों और अत्यधिक डिलीवरी दबाव के विरोध में प्रदर्शन और हड़तालें हो रही थीं। 31 दिसंबर, 2025 को हुई राष्ट्रीय स्तर की गिग वर्कर्स हड़ताल ने इस मुद्दे को और उभारा।
सरकार और श्रम मंत्रालय की चिंता मुख्य रूप से राइडर्स की सुरक्षा से जुड़ी थी। तंग डिलीवरी समयसीमा के कारण तेज गाड़ी चलाना, भीड़भाड़ वाले रास्तों और खराब मौसम में जोखिम बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना अधिक होती है। केंद्रीय श्रम मंत्री मंसुख मंडाविया ने कई बैठकों में प्लेटफॉर्म्स से कहा कि वे “कठोर डिलीवरी टाइमलाइन का प्रचार” न करें।
क्विक-कॉमर्स सेवाएं महामारी के दौरान तेजी से विकसित हुईं और भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी आदतों को बदल दिया। IIM अहमदाबाद की गौरी रजनेकर ने कहा, “महामारी के बाद सुपरमार्केट सामान की तेजी से डिलीवरी की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।”
नई श्रम कानूनों के तहत अब गिग इकॉनमी कंपनियों को नेशनल सोशल सिक्योरिटी फंड में कर्मचारियों की वेतन का 1–5% योगदान करना होगा।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। Blinkit ने अपना टैगलाइन बदलकर “10,000+ प्रोडक्ट्स 10 मिनट में डिलीवर” से “30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे पर” कर दिया। Zepto ने डिलीवरी समय 16 मिनट या उससे अधिक करने का निर्णय लिया। जबकि Eternal और Zepto ने टिप्पणी करने से इनकार किया, गिग वर्कर्स ने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली।
Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart ने डार्क स्टोर्स में भारी निवेश किया है, जो स्थानीय भंडारण और त्वरित डिलीवरी को सक्षम बनाते हैं। इसके बावजूद, कर्मचारी सुरक्षा और काम का दबाव लगातार चर्चा में बना हुआ है।