ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व की ओर अमेरिकी युद्धपोतों का एक बड़ा बेड़ा भेजे जाने के दावे के एक दिन बाद ईरान ने तीखी चेतावनी जारी की है। तेहरान ने साफ शब्दों में कहा है कि उसके खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को “ऑल-आउट वॉर” यानी पूरी जंग माना जाएगा और उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका द्वारा किए जा रहे सैन्य जमावड़े को तेहरान सीधे खतरे के तौर पर देख रहा है। अधिकारी के अनुसार, अगर ईरान पर हमला हुआ तो वह अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करते हुए जवाब देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी हमले को “सीमित” या “सर्जिकल” बताकर हल्का नहीं किया जा सकता।
‘सीमित हमला भी पूरी जंग माना जाएगा’
ईरानी अधिकारी ने कड़े लहजे में कहा, “चाहे हमला सीमित कहा जाए, सर्जिकल ऑपरेशन बताया जाए या किसी और नाम से पेश किया जाए, हमारे लिए वह पूर्ण युद्ध के बराबर होगा।” उन्होंने आगे जोड़ा कि ईरान किसी भी आक्रामक कदम का जवाब अधिकतम सैन्य शक्ति के साथ देगा।
इस तरह की बयां तब आयी जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व की ओर एक “आर्माडा” यानी विशाल नौसैनिक बेड़े को रवाना कर दिया है। इस दावे ने उस तनाव को फिर से हवा दे दी है, जो बीते कुछ दिनों में कुछ हद तक शांत होता दिख रहा था।
मध्य पूर्व की ओर अमेरिकी सैन्य तैनाती
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत ‘अब्राहम लिंकन’ और टॉमहॉक मिसाइलों से लैस तीन विध्वंसक युद्धपोत मध्य पूर्व भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी वायुसेना के एफ-15ई लड़ाकू विमानों की तैनाती की भी जानकारी सामने आई है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस सैन्य तैनाती को लेकर आधिकारिक तौर पर सीमित जानकारी ही दी गई है, लेकिन ट्रंप के बयान के बाद इसे ईरान के खिलाफ दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान की सेना हाई अलर्ट पर
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि देश की सशस्त्र सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी संभावित जवाबी कार्रवाई में किन कदमों को शामिल किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह सैन्य जमावड़ा किसी वास्तविक टकराव के लिए नहीं है, लेकिन हमारी सेना हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी संघर्ष की शुरुआत नहीं चाहता, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा।
आंतरिक संकट के बीच बढ़ता बाहरी दबाव
यह सैन्य तनाव ऐसे वक्त में बढ़ रहा है, जब ईरान के भीतर लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है। बीते कई महीनों से देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिन पर सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की है। मानवाधिकार संगठनों और एक्टिविस्ट समूहों का दावा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है। अंदरूनी अशांति और बाहरी सैन्य दबाव के बीच ईरान की स्थिति और जटिल होती जा रही है।
कुछ दिनों की राहत, फिर बढ़ा तनाव
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ हद तक कम होता नजर आया था। उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई से कदम पीछे खींच लिए हैं। ट्रंप ने कहा था कि ईरान की ओर से उन्हें यह आश्वासन मिला है कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाएगी। इसके बाद ट्रंप ने दावा किया था कि उनके दबाव के कारण सैकड़ों कैदियों को फांसी से बचाया गया। इस बयान के बाद ऐसा लगा था कि दोनों देशों के बीच टकराव टल सकता है।
फिर क्यों बिगड़े हालात?
हालात तब फिर बिगड़ गए, जब अमेरिकी सैन्य तैनाती की खबरें सामने आईं और ईरान के सैन्य नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। ईरानी सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ कोई कदम उठाया गया, तो इसके “विनाशकारी परिणाम” होंगे। वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की धमकियों के जवाब में ईरान “ट्रिगर पर उंगली” रखे हुए है। इस बयान को सीधे सैन्य टकराव की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
दावोस से लौटते ट्रंप, बढ़ी चिंताएं
यह नया टकराव ऐसे समय उभरा है, जब डोनाल्ड ट्रंप विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में शामिल होकर दावोस से अमेरिका लौटे हैं। उनके लौटते ही अमेरिकी बयानबाजी में सख्ती और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब सीधे टकराव में बदल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों की सख्त भाषा और सैन्य तैयारियां किसी भी छोटी चूक को बड़े संघर्ष में बदल सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकीं
मध्य पूर्व में किसी भी तरह का बड़ा सैन्य संघर्ष वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है। तेल आपूर्ति, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका-ईरान तनाव को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव सिर्फ बयानबाजी और सैन्य दबाव तक सीमित रहेगा, या फिर हालात वास्तव में युद्ध की ओर बढ़ेंगे।