सिडनी बीच आतंकी हमला: संदिग्ध साजिद अकरम का भारत से टूटा था नाता, पिता की मौत पर भी नहीं लौटा हैदराबाद

Vin News Network
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बोंडी बीच हमला: तेलंगाना पुलिस ने साफ किया कि संदिग्ध साजिद अकरम का भारत से रिश्ता सालों पहले टूट चुका था

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर यहूदी समुदाय के कार्यक्रम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में जांच कर रही तेलंगाना पुलिस ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। पुलिस के अनुसार, हमले के मुख्य आरोपी 50 वर्षीय साजिद अकरम का अपने मूल देश भारत और हैदराबाद स्थित परिवार से संबंध लगभग खत्म हो चुका था। यहाँ तक कि पिता के निधन पर भी वह भारत नहीं आया था।

हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया तक का सफर
तेलंगाना पुलिस के विवरण के अनुसार, साजिद अकरम मूल रूप से हैदराबाद का रहने वाला था। उसने यहीं से बी.कॉम (B.Com) की डिग्री हासिल की और बेहतर भविष्य की तलाश में नवंबर 1998 में ऑस्ट्रेलिया चला गया। हालांकि साजिद के पास अभी भी भारतीय पासपोर्ट था, लेकिन पिछले 27 वर्षों में उसने अपनी जड़ों से दूरी बना ली थी। सिडनी में बसने के बाद उसने एक यूरोपीय मूल की महिला से शादी की, जिनसे उसके दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) हैं। उसका बेटा नावेद अकरम (24 वर्ष) भी इस हमले में उसके साथ शामिल था।

परिवार से दूरी और सीमित दौरे
जांच में यह बात सामने आई है कि ऑस्ट्रेलिया प्रवास के बाद साजिद ने केवल छह बार भारत का दौरा किया। ये यात्राएं भी मुख्य रूप से संपत्ति संबंधी विवादों को सुलझाने या अपने बुजुर्ग माता-पिता से मिलने तक सीमित थीं। पुलिस ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि वह अपने पिता की मृत्यु के समय भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत नहीं आया था, जो उसके परिवार के साथ न्यूनतम संपर्क को दर्शाता है।

बोंडी बीच हमला और फिलीपींस कनेक्शन
14 दिसंबर को सिडनी के बोंडी बीच पर ‘हनुक्का’ (Hanukkah) उत्सव के दौरान साजिद और उसके बेटे नावेद ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस कायराना हमले में 15 निर्दोष लोगों की जान चली गई और 42 अन्य घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने साजिद को ढेर कर दिया, जबकि घायल नावेद फिलहाल अस्पताल में पुलिस की कड़ी निगरानी में है।

फिलीपींस के आव्रजन ब्यूरो ने पुष्टि की है कि हमले से कुछ समय पहले साजिद और उसका बेटा फिलीपींस गए थे। वे 1 नवंबर 2025 को सिडनी से वहां पहुंचे और दावो (Davao) शहर में रुके। दावो क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़ी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। वे 28 नवंबर को वापस सिडनी लौटे, जिसके कुछ ही दिनों बाद इस हमले को अंजाम दिया गया।

कट्टरपंथ का भारत से कोई संबंध नहीं
तेलंगाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साजिद के कट्टरपंथी बनने के पीछे भारत या तेलंगाना का कोई प्रभाव नहीं है। हैदराबाद में रह रहे उसके रिश्तेदारों ने भी साजिद की ऐसी किसी संदिग्ध गतिविधि या विचारधारा के बारे में अनभिज्ञता जताई है। 1998 में भारत छोड़ने से पहले भी साजिद का कोई आपराधिक या संदिग्ध रिकॉर्ड नहीं था। पुलिस के अनुसार, साजिद और उसके बेटे का झुकाव संभवतः ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान या विदेशी यात्राओं के दौरान कट्टरपंथ की ओर हुआ।

अंतरराष्ट्रीय जांच और ‘इस्लामिक स्टेट’ की विचारधारा
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने इस घटना को एक “लक्षित आतंकवादी हमला” करार दिया है, जो इस्लामिक स्टेट (IS) की विचारधारा से प्रेरित था। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, भारत और फिलीपींस की एजेंसियां मिलकर इस बात की जांच कर रही हैं कि साजिद और नावेद ने इस हमले की योजना कहाँ बनाई और क्या उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से मदद मिल रही थी।करता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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