जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक बार फिर सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब रविवार शाम नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के अलग-अलग इलाकों में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। ड्रोन जैसी गतिविधियों के सामने आते ही भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए फायरिंग की और काउंटर-ड्रोन सिस्टम को सक्रिय कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई के बाद सभी संदिग्ध ड्रोन वापस सीमा पार जाते हुए देखे गए। फिलहाल प्रभावित इलाकों में सघन तलाशी अभियान जारी है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पहली संदिग्ध ड्रोन गतिविधि शाम करीब 6 बजकर 25 मिनट पर पुंछ जिले के मनकोट सेक्टर में देखी गई। बताया गया कि एक ड्रोन जैसी वस्तु पाकिस्तान की ओर से तैन इलाके से उड़ान भरते हुए टोपे क्षेत्र की ओर बढ़ती हुई नजर आई। जैसे ही सेना की निगरानी टीमों ने इस गतिविधि को पकड़ा, पूरे इलाके को अलर्ट पर डाल दिया गया।
इसके कुछ ही मिनट बाद, शाम 6 बजकर 35 मिनट के आसपास राजौरी जिले के तेरयाथ इलाके के खब्बर गांव में एक और ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान कालाकोट क्षेत्र के धर्मसाल गांव से भराख की दिशा में एक चमकती हुई रोशनी भी दिखाई दी, जिससे ड्रोन की मौजूदगी की आशंका और मजबूत हो गई।
लगभग 40 मिनट बाद तीसरी घटना सामने आई। शाम करीब 7 बजकर 15 मिनट पर सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में चक बबराल गांव के ऊपर एक और ड्रोन जैसी वस्तु कुछ देर तक मंडराती हुई देखी गई। इस ड्रोन से भी लगातार ब्लिंकिंग लाइट दिखाई दे रही थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई सामान्य हवाई वस्तु नहीं थी।
लगातार मिल रही इन सूचनाओं के बाद सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम यानी काउंटर-यूएएस को सक्रिय कर दिया। इन अत्याधुनिक प्रणालियों की मदद से ड्रोन की लोकेशन ट्रैक की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपायों के जरिए उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश की गई। रक्षा सूत्रों के अनुसार, काउंटर-ड्रोन कार्रवाई के बाद सभी संदिग्ध ड्रोन सीमा पार पाकिस्तान की ओर लौटते हुए देखे गए।
हालांकि अभी तक किसी ड्रोन को मार गिराए जाने या विस्फोटक सामग्री गिराए जाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन का इस्तेमाल अक्सर हथियार, गोला-बारूद या नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकियों को मदद पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है।
ड्रोन की गतिविधियों के बाद पुंछ, राजौरी और सांबा जिलों के सीमावर्ती गांवों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमें संदिग्ध इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी तरह की सामग्री जमीन पर नहीं गिराई गई हो।
इससे पहले रविवार को ही जम्मू के अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे कनाचक इलाके में भी सुरक्षा बलों ने एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया था। यह कार्रवाई उस समय की गई जब खुफिया एजेंसियों ने संदिग्ध आतंकियों के बीच सैटेलाइट फोन से हुई बातचीत को इंटरसेप्ट किया।
अधिकारियों के मुताबिक, यह बातचीत एक सैटेलाइट डिवाइस के जरिए की जा रही थी, जिससे इस बात की आशंका जताई गई कि आतंकवादी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में हैं। इंटरसेप्ट की गई जानकारी के आधार पर तुरंत अलर्ट जारी किया गया और कनाचक क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
इस संयुक्त अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारतीय सेना के जवान शामिल हैं। सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ इलाके की घेराबंदी कर रही हैं।
कनाचक इलाका जम्मू शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित है और अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह क्षेत्र पहले भी आतंकियों द्वारा घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है। इसी वजह से यहां किसी भी संदिग्ध गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि कनाचक के साथ-साथ जम्मू संभाग के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। इसमें ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाके भी शामिल हैं, जहां आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।
खुफिया सूत्रों का कहना है कि जम्मू क्षेत्र में फिलहाल करीब तीन दर्जन आतंकवादी सक्रिय हो सकते हैं। ये आतंकी सीमा पार से घुसपैठ कर स्थानीय नेटवर्क की मदद से किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हो सकते हैं। इसी इनपुट के आधार पर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
सेना और सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र को और सख्त किया गया है। रात के समय थर्मल इमेजिंग, नाइट विजन डिवाइस और रडार सिस्टम की मदद से सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत और प्रभावी जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए की जा रही घुसपैठ और आतंकियों की मदद की कोशिशों को हर हाल में नाकाम किया जाएगा।
इन घटनाओं के बाद सीमावर्ती गांवों के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी तरह की संदिग्ध वस्तु, ड्रोन के टुकड़े या अनजान गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत सुरक्षा बलों को सूचित करें और खुद उसे छूने की कोशिश न करें।
जम्मू-कश्मीर में ड्रोन गतिविधियों और खुफिया इनपुट्स के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। सेना और अन्य बलों की त्वरित कार्रवाई से फिलहाल किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में भी सीमा और अंदरूनी इलाकों में चौकसी बनाए रखने के संकेत दिए गए हैं।