न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता बनर्जी ने BJP पर लगाया साजिश का आरोप

Vin News Network
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मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और सड़क जाम के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शांति बनाए रखने और उकसावे में न आने की अपील की

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है. कालियाचक-II ब्लॉक में सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं, को ग्रामीणों ने घंटों तक बंधक बनाए रखा. इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे न्यायपालिका को डराने-धमकाने का एक “धृष्ट प्रयास” बताया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में एक जनसभा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया. उन्होंने जनता से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के उकसावे का शिकार न बनें और शांति बनाए रखें. मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के साथ जो हुआ, उसके पीछे कौन है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है क्योंकि वर्तमान में राज्य प्रशासन चुनाव प्रक्रिया के कारण उनके पूर्ण नियंत्रण में नहीं है.

मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर सहित कई अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में जानबूझकर नाम काटे गए हैं. उन्होंने इसे भाजपा का “गेम प्लान” बताते हुए कहा कि विपक्षी दल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की परिस्थितियां उत्पन्न करना चाहता है. ममता बनर्जी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 60 लाख संदिग्ध मतदाताओं की जांच की जा रही है, जिनमें से 22 लाख मतदाताओं के नाम बहाल रखे गए हैं. उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करेगी और ट्रिब्यूनल के माध्यम से वे अपने नाम वापस जुड़वा सकते हैं.

जमीनी स्तर पर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है. प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 (NH-12) के दो प्रमुख चौराहों पर बांस, बेंच और पेड़ के तने रखकर रास्ता बंद कर दिया और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. इससे हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया. पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बाद कुछ जगहों से जाम हटाया जा सका है. इससे पहले, कालियाचक में बंधक बनाए गए न्यायिक अधिकारियों को पुलिस के एक विशेष दस्ते ने आधी रात के बाद कड़ी मशक्कत से बाहर निकाला. इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें एक कांस्टेबल और दो नागरिक घायल हो गए.

निर्वाचन आयोग (EC) इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने मालदा जिला प्रशासन और पुलिस महानिदेशक (DGP) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने इस स्थिति से कलकत्ता उच्च न्यायालय को भी अवगत कराया है. अब तक जांच के अधीन 60 लाख मामलों में से 49 लाख का निपटारा किया जा चुका है. जो लोग मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, उनकी अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं, हालांकि इन्होंने अभी काम करना शुरू नहीं किया है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से बार-बार आग्रह किया कि वे कानून को अपने हाथ में न लें. उन्होंने कहा कि सड़क जाम करने और अधिकारियों का घेराव करने से केवल उन ताकतों को फायदा होगा जो बंगाल में लोकतांत्रिक चुनाव नहीं चाहते. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे निर्वाचन आयोग द्वारा बताए गए 13 वैकल्पिक दस्तावेजों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपना दावा पेश करें. सरकार की ओर से हर संभव सहायता का वादा करते हुए उन्होंने दोहराया कि तृणमूल कांग्रेस केवल शांतिपूर्ण चुनाव के माध्यम से ही सत्ता में वापसी चाहती है. मालदा में भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है.

धधक उठी कुवैत की रिफाइनरी हॉर्मुज जलमार्ग को बचाने के लिए बहरीन ने सुरक्षा परिषद में रखा कड़ा प्रस्ताव

मध्य पूर्व में चल रहा सैन्य संघर्ष अब उन पड़ोसी देशों तक भी फैल गया है जो सीधे तौर पर इस जंग का हिस्सा नहीं थे. शुक्रवार यानि आज को कुवैत की प्रसिद्ध मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन के जरिए हमला किया गया. कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने आधिकारिक बयान में बताया कि इस हमले के कारण रिफाइनरी की कई इकाइयों में आग लग गई है. राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं मिली है. वहां की फायरफाइटिंग टीमें और इमरजेंसी यूनिट्स आग को बुझाने और उसे दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए लगातार काम कर रही हैं.

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक मसौदा पेश किया है. इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशों को सभी जरूरी रक्षात्मक कदम उठाने की छूट दी जाए. जानकारों का मानना है कि इस प्रस्ताव पर आज ही मतदान हो सकता है. ऐसी खबरें भी हैं कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद रूस इस प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगा. इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने की कोशिशों को बल मिल सकता है.

सुरक्षा के मोर्चे पर बहरीन ने हाल ही में अपने देश की टेलीकॉम कंपनी बटेलको के मुख्यालय पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अमेज़न के डेटा सेंटर पर हमला बताया था, जिसे बहरीन ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है. वहीं दूसरी तरफ, दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दुबई के ओरेकल डेटा सेंटर पर हमले की बात कही जा रही थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये खबरें पूरी तरह से झूठी हैं और लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए.

युद्ध के बढ़ते दायरे को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा सुरक्षा निर्णय लिया है. यूएई ने ईरानी नागरिकों के देश में प्रवेश और यहां से होकर दूसरे देशों में जाने (ट्रांजिट) पर पूरी तरह रोक लगा दी है. एमिरेट्स और एतिहाद जैसी बड़ी एयरलाइनों ने अपनी वेबसाइट पर इस नए नियम की जानकारी साझा की है. यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अपनी आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है.

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