सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 फरवरी) को दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों को नोटिस जारी कर उन राज्यों में विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना पर जवाब मांगा है, जहां आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत 10 या उससे अधिक मामले लंबित हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से इस संबंध में प्रतिक्रिया देने को कहा है। पीठ में न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया भी शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अदालत में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि जिन राज्यों में एनआईए द्वारा 10 या अधिक मामलों की जांच की जा रही है, वहां विशेष अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि इन विशेष अदालतों के लिए वित्तीय सहायता संबंधी मानदंड तय कर दिए गए हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार प्रत्येक विशेष अदालत के लिए एकमुश्त एक करोड़ रुपये का अनुदान देगी तथा इसके बाद प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी।
यह राशि बुनियादी ढांचे के विकास, आईटी उपकरणों की खरीद, वाहनों और कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 59, जम्मू-कश्मीर में 38, असम में 33 तथा गुजरात और केरल में 33-33 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 17 राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करें, ताकि विशेष अदालतों की स्थापना की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया जा सके।
अदालत ने कहा कि वह तीन सप्ताह बाद इस मामले की अगली सुनवाई करेगी और अन्य विशेष अदालतों की स्थापना से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करेगी।