तमिलनाडु सरकार द्वारा चुनाव आयोग के मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए तैयार होने का संकेत दिया है। डीएमके की ओर से दायर चुनौती में केंद्रित अनुरोध यह है कि 28 नवंबर के नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए और तमिलनाडु में एसआईआर कराने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
डीएमके ने अपनी याचिका में एसआईआर की प्रक्रिया को असंवैधानिक और मनमाना बताया है। संगठनात्मक स्तर पर पार्टी ने कहा है कि यह प्रक्रिया संविधान के समानता, अभिव्यक्ति व जीवन के अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद (अनुच्छेद 14, 19 और 21) तथा जनप्रतिनिधित्व कानून के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करती है और इससे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट में डीएमके की पैरवी वरिष्ठ वकील विवेक सिंह ने की। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ के समक्ष उन्होंने याचिका पर तात्कालिक सुनवाई की मांग रखी, जिसके बाद पीठ ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया सुनवाई 11 नवंबर को हो सकती है।
पृष्ठभूमि के रूप में बताना जरूरी है कि चुनाव आयोग ने 28 नवंबर को नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का नोटिफिकेशन जारी किया था। यह प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगी; उसके बाद 9 दिसंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी होगा और आपत्तियों व दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर के दायरे में तमिलनाडु के साथ केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।
डीएमके का तर्क है कि एसआईआर के कारण बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में बदलाव होने किसी वर्ग विशेष के मतदाताओं के बहिष्कार या प्रशासनिक त्रुटियों से आम नागरिकों के मताधिकार प्रभावित होने का जोखिम है। इसलिए पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह प्रक्रिया को रुकवाकर उसकी संवैधानिक वैधता पर जांच कराए।
अब यह देखना होगा कि उच्चतम न्यायालय आगामी सुनवाई में किन पहलुओं पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब करता है और क्या याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित होता है, जिससे तमिलनाडु में एसआईआर की प्रक्रिया प्रभावित हो सके।