हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल फटने की घटनाओं ने लोगों को दहला दिया। कुल्लू के हिड़व, शरची और बशला, रामपुर के ज्यूरी के बधाल और चंबा के चुराह में बादल फटने से मकानों, पुलों, सड़कों और सेब के बगीचों को भारी नुकसान हुआ है।
रामपुर के 12/20 क्षेत्र में भूस्खलन से पांच घर क्षतिग्रस्त हो गए। यहां पिता-पुत्र मलबे में दबकर घायल हुए जिन्हें ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
मणिमहेश यात्रा मार्ग पर संकट, 6,000 श्रद्धालु सुरक्षित निकाले
भारी बारिश और भूस्खलन के चलते मणिमहेश यात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु फंस गए थे। शनिवार को प्रशासन और पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाकर करीब 6,000 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया। इन्हें सरकारी व निजी वाहनों से उनके घरों की ओर भेजा गया। मुख्य सचिव ने बताया कि भरमौर में अब भी लगभग 5,000 और चंबा में 500 यात्री फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने का काम जारी है।
सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित
भरमौर-पठानकोट हाईवे रजेरा से आगे पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। करीब 20 किलोमीटर सड़क जमींदोज हो गई। भरमौर-पांगी और चुराह का शेष दुनिया से संपर्क कट गया है। चुराह में सतनाला पहाड़ी पर बादल फटने से बैरागढ़, देवीकोठी और टेपा गांव का संपर्क टूट गया। यहां पांच पुलिया बह गईं और सतनाला पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया।
कुल्लू में बंजार और नित्थर में भारी तबाही
कुल्लू जिले के नित्थर के बशला गांव में रात 10 बजे बादल फटने से चार घर और कई सेब बगीचे तबाह हो गए। वहीं बंजार के हिड़व नाले में बादल फटने से एक घर, दो मंदिर, एक मछली फार्म और कई घराट बह गए। वन विभाग की पुलिया और एक कार भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। शरची नाले में भी बादल फटा, हालांकि यहां अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ।
रामपुर में बधाल गांव का हाल
रामपुर के ज्यूरी क्षेत्र के बधाल में बादल फटने से धराली खड्ड उफान पर आ गई। रात को हाईवे के कलवर्ट बंद हो जाने से पानी और मलबा रिहायशी इलाकों में घुस गया। कई घरों और बगीचों को नुकसान हुआ। ग्रामीणों को रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी।
बुनियादी ढांचे पर बड़ा असर
प्रदेश में लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। तीन नेशनल हाईवे समेत 839 सड़कें बंद हैं। 728 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं। 456 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। चंडीगढ़-मनाली हाईवे शाम को छोटे वाहनों के लिए खोला गया, लेकिन किरतपुर-मनाली नेशनल हाईवे-3 जगह-जगह ध्वस्त होने के कारण बंद है।
मौसम विभाग का अलर्ट
हिमाचल मौसम विज्ञान केंद्र ने रविवार को चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट लागू है। सोमवार को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी और शिमला में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
सीएम सुक्खू का आश्वासन
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मणिमहेश यात्रा मार्ग पर किसी भी श्रद्धालु की मौत नहीं हुई है। जिनकी मौत हुई है, वे या तो दुर्घटना के शिकार हुए या सांस फूलने से। उन्होंने कहा कि अब कोई भी श्रद्धालु फंसा नहीं है, सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। श्रद्धालुओं को हेलिकॉप्टर से भी चंबा लाने की योजना बनाई जा रही है। सड़कें खोलने के लिए मशीनरी लगाई गई है और राहत कार्यों में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
सीएम का हवाई निरीक्षण
मुख्यमंत्री सुक्खू भरमौर और मणिमहेश यात्रा क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलिकॉप्टर हेलीपैड पर नहीं उतर सका। उन्हें चंबा शहर के बाहरी हिस्से करियां स्थित हेलीपैड पर लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने चौपर से हवाई सर्वेक्षण किया।
एम्बुलेंस खाई में गिरी, चालक घायल
लगातार हो रही बारिश ने सड़कों को इतना कमजोर कर दिया है कि हादसे रुक नहीं रहे। रविवार सुबह मंडी के झलोगी में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर एक एम्बुलेंस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई।
एम्बुलेंस कुल्लू से मरीज छोड़कर लौट रही थी। गनीमत यह रही कि वाहन ब्यास नदी में गिरने से कुछ दूरी पहले ही रुक गया। हादसे में चालक घायल हुआ, लेकिन अन्य कोई यात्री मौजूद नहीं था। पुलिस और स्थानीय लोगों ने तुरंत चालक को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
प्रशासन और लोगों की जद्दोजहद
बारिश से प्रभावित इलाकों में स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों ने खुद की जान जोखिम में डालकर मलबे में दबे लोगों को निकाला। वहीं प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है।
प्रकृति का प्रकोप और जिंदगियों पर असर
कुल्लू, चंबा, रामपुर और मंडी जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और आपदाओं से जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सेब बगीचों को हुआ नुकसान स्थानीय किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका है, वहीं यात्री और आम लोग अभी भी सुरक्षित निकलने की कोशिश कर रहे हैं।