ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ईश्वर है और मिडिल कोर्ट हमारा हृदय है,” यानी अंतिम न्याय परमात्मा के हाथ में है, जबकि मनुष्य को अपने अंतर्मन से न्याय करना चाहिए।
इस बीच, संत समाज के कई प्रमुख लोग उनके समर्थन में सामने आए हैं। विशेष रूप से फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य को एक सुनियोजित साजिश के तहत झूठे POCSO मामले में फंसाया जा रहा है।
फलाहारी महाराज के अनुसार, इस कथित साजिश के पीछे शामली का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर आशुतोष पांडेय उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी है। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष पांडेय का आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें गौकशी, गैंगस्टर से संबंध, संत प्रेमानंद महाराज से धन उगाही के आरोप, फर्जी हमले और पाकिस्तान से धमकी का नाटक शामिल हैं।
फलाहारी महाराज ने यह भी कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे ‘इच्छा मृत्यु’ (euthanasia) की अनुमति मांगने को मजबूर होंगे। इस बयान ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
देखा जाये तो यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बीच सत्य सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।