छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में चल रहे 60वें अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित देशभर के पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हैं। यह सम्मेलन तीन दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श करना तथा पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था के सुधार के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है।
आज सम्मेलन में कुल चार सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें हर राज्य के डीजीपी अपनी प्रेजेंटेशन देंगे। मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा, उभरती हुई चुनौतियों और पिछली सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा पर रहेगा। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन में महिला सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते उपयोग, जन-आंदोलनों का प्रबंधन, भारतीय भगोड़ों की वतन वापसी के रोडमैप, फॉरेंसिक तकनीक और अनुसंधान की सफलताओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इस वर्ष की थीम “विकसित भारत, सुरक्षित भारत” को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ डीजीपी अरुण देव गौतम बस्तर 2.0 पर अपने अपडेट देंगे और मार्च 2026 में नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद क्षेत्रीय विकास की रणनीति पर विचार प्रस्तुत करेंगे। इसके माध्यम से न केवल सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय विकास और सामाजिक पुनर्निर्माण के मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 8:15 बजे IIM पहुंचे और उन्होंने रात 8 बजे तक लगातार लगभग 12 घंटे तक सुरक्षा, आतंकवाद, नक्सलवाद, साइबर सुरक्षा और उभरते खतरों पर गहन चर्चा की। पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ठहरने की व्यवस्था M-1 और M-11 में की गई है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, डिप्टी NSA, IB प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सर्किट हाउस में रह रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी एडीजी दीपांशु काबरा और आईजी अमरेश मिश्रा ने संभाली है। राज्य पुलिस, केंद्रीय फोर्स और इंटेलिजेंस एजेंसियों के सहयोग से सम्मेलन में शामिल होने वाले 33 राज्यों के डीजीपी, पैरामिलिट्री और पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इस व्यापक व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी अधिकारी सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से सम्मेलन में भाग ले सकें।
यह सम्मेलन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां वे राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से इस सम्मेलन में लगातार गहरी रुचि दिखाई है और इसे पेशेवर, संवादात्मक और रणनीतिक बनाने का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल रिपोर्ट प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक और रणनीतिक समाधान विकसित करना है, जो पुलिस बलों के परिचालन और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाए।
इस तरह के सम्मेलन से न केवल वर्तमान सुरक्षा खतरों का आकलन संभव होता है, बल्कि यह भविष्य में उभरने वाले खतरे और जोखिमों से निपटने के लिए पुलिस बलों को तैयार करने का अवसर भी प्रदान करता है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुभव और विचार साझा करने के माध्यम से कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
संक्षेप में, 60वां अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन एक ऐसा मंच साबित हो रहा है, जो देश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहन विचार-विमर्श, रणनीति निर्माण और आधुनिक तकनीक के प्रयोग के माध्यम से पुलिसिंग में सुधार करने का अवसर देता है। इस आयोजन से देशभर में पुलिस बलों की कार्यक्षमता, संचालन दक्षता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता को और सुदृढ़ किया जा रहा है।