नई दिल्ली। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को “डेड” (Dead Economy) बताने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सहमति ने सियासी हलकों में गर्माहट ला दी है। राहुल गांधी के इस बयान को लेकर अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाया है। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता को इस तरह की टिप्पणियों के असर को समझना चाहिए।
राहुल गांधी का यह बयान न केवल विपक्षियों के लिए बल्कि खुद उनकी पार्टी कांग्रेस के अंदर भी असहजता का कारण बन गया है। कांग्रेस के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस बयान से दूरी बना ली है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्र की छवि के खिलाफ बताकर चौतरफा हमला कर रही है।
बात कहां से शुरू हुई?
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की रैली के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में कहा था:
“भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं डेड हैं। अमेरिका ही असली सुपरपावर है।”
इस पर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक सभा में प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की आर्थिक स्थिति को सही बताया है। यह कड़वा सच है जिसे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री नहीं मानते।”
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“राहुल गांधी कोई बच्चे नहीं हैं। उन्हें समझना चाहिए कि ऐसे बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक जिम्मेदार नेता को इस तरह के वक्तव्यों से बचना चाहिए।”
रिजिजू ने आगे कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ऐसे समय में जब देश निवेश, तकनीक और रोजगार के क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है, विपक्ष द्वारा भारत की छवि को खराब करना निंदनीय है।
कांग्रेस के अंदर भी मचा मतभेद
राहुल गांधी के बयान से कांग्रेस के भीतर भी असहजता देखी जा रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर टिप्पणी से इनकार कर दिया है, वहीं एक गुट ने निजी रूप से इसे “अवांछनीय” करार दिया है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा: “राहुल गांधी का बयान उस समय आया जब भारत वैश्विक स्तर पर जी20 अध्यक्षता कर चुका है और बड़े आर्थिक मंचों पर भागीदारी कर रहा है। ऐसे समय में इस तरह की टिप्पणियां गैर-जरूरी हैं।”
वास्तविकता में भारत की इकोनॉमी का क्या है हाल?
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ रेट 2024-25 में अनुमानित 6.8% तक बनी हुई है। IMF और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संस्थान भी भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का “ब्राइट स्पॉट” बता चुके हैं। स्टार्टअप्स, डिजिटल इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां जरूर हैं, जैसे महंगाई और बेरोजगारी, लेकिन समग्र रूप से भारत की अर्थव्यवस्था “डेड” कहना तथ्यों से परे माना जा रहा है।
राजनीतिक बयान या रणनीतिक दांव?
विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जो सरकार की आर्थिक नीतियों पर सीधा हमला करता है। हालांकि, जिस तरह से उन्होंने एक विदेशी नेता की नकारात्मक टिप्पणी को सार्वजनिक मंच पर दोहराया, वह राजनीतिक दृष्टिकोण से उल्टा भी पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राकेश ठाकुर कहते हैं: “राहुल गांधी को जनसंवाद की कला आती है, लेकिन कई बार उनके बयान राजनीति से ज्यादा आत्म-आलोचना लगते हैं। इस तरह के वक्तव्य विपक्ष को मजबूत नहीं करते, बल्कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय छवि की ढाल मिल जाती है।”
भाजपा का बड़ा हमला
भाजपा प्रवक्ताओं ने राहुल गांधी के इस बयान को “राष्ट्र विरोधी मानसिकता” करार दिया। सोशल मीडिया पर भी भाजपा समर्थकों ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा: “राहुल गांधी एक विदेशी की बात को सच मानते हैं, लेकिन देशवासियों की मेहनत और भारत की उपलब्धियों पर उन्हें भरोसा नहीं।”
मामले का राजनीतिक असर
2024 लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार राहुल गांधी को नेता विपक्ष का दर्जा मिला है। उनके बयानों पर अब ज्यादा राजनीतिक और कूटनीतिक वजन है। ऐसे में इस बयान का असर सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी रणनीति पर भी असर डालेगा।