भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी नवीनतम बैठक में आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए रेपो रेट में कटौती का निर्णय लिया है। इसके साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौजूदा आर्थिक स्थिति को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ करार दिया जिसका अर्थ है न बहुत तेज़, न बहुत धीमी बल्कि पूरी तरह संतुलित अर्थव्यवस्था।
रेट कटौती के बाद होम लोन और कार लोन जैसी देनदारियों पर ईएमआई कम होने की उम्मीद है। उदाहरण के तौर पर, 50 लाख रुपये के 20 साल वाले होम लोन पर 0.25% ब्याज कटौती से हर महीने करीब 788 रुपये और साल भर में लगभग 9,456 रुपये की बचत हो सकती है। कार लोन में भी इसी अनुपात से राहत मिलेगी।
आरबीआई ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती इस बात का संकेत है कि विकास की रफ्तार बनी रहेगी। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर लगातार सुधार दिखा रहे हैं जो अर्थव्यवस्था के दो बड़े स्तंभ हैं। उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक बताते हैं कि तीसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियां तेज रहेंगी और मांग में कमी की संभावना नहीं है।
महंगाई तेजी से नीचे आने से आम लोगों की जेब पर बोझ कम होगा। गवर्नर ने साफ किया कि कीमतों में स्थिरता और वृद्धि, दोनों को संतुलित रखने के लिए मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा गया है। इसका मतलब है कि आगे भी ब्याज दरों में स्थिरता या और कमी देखने को मिल सकती है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है और 686 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिससे देश अगले कई महीनों का आयात आराम से संभाल सकता है। इससे रुपये को मजबूती और स्थिरता मिलती है।
गवर्नर ने बैंकों को सलाह दी कि वे मुनाफे पर फोकस करने की बजाय ग्राहकों की जरूरतों को प्राथमिकता दें। साथ ही यह भी आश्वस्त किया कि त्योहारों और बढ़ती क्रेडिट मांग के बीच आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराता रहेगा, जिससे बाजार में लिक्विडिटी की कमी नहीं होगी। कुल मिलाकर, आरबीआई की यह मौद्रिक नीति देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देती है लोन सस्ते होंगे, महंगाई कम होगी और विकास की रफ्तार और तेज़ हो सकती है।